GST Rate Cut E-commerce Price Hike: GST Rate में कटौती का मतलब होता है कि आम आदमी की जेब पर बोझ कम होना चाहिए। लेकिन इस बार स्थिति उलट देखने को मिली। केंद्र सरकार द्वारा 22 सितंबर 2025 से लागू किए गए नए GST Rate Slabs का असर तो दुकानों और बाजारों में दाम कम करने के रूप में दिखा, लेकिन ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर ग्राहकों ने उल्टी तस्वीर देखी। Flipkart, Amazon, Blinkit और Zepto जैसे बड़े ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर कई प्रोडक्ट्स की कीमतें कम होने की जगह बढ़ गईं।
GST Rate Cut E-commerce Price Hike: सरकार की चेतावनी और जांच
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में कई ग्राहकों ने राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई। सरकार ने तुरंत संज्ञान लिया और इन ई-कॉमर्स कंपनियों से जवाब-तलब किया। बताया गया कि केंद्र पहले से ही आशंका जता रहा था कि टैक्स कटौती का पूरा लाभ उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंचेगा। इसी कारण वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग ने सभी केंद्रीय GST कमिश्नरों को 54 आवश्यक वस्तुओं की कीमतें 22 सितंबर से पहले और बाद की तुलना में जमा करने का निर्देश दिया था।
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उपभोक्ताओं की शिकायतें और कंपनियों का बचाव
सरकार को अब तक करीब 3000 शिकायतें मिली हैं कि ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स ने टैक्स कम होने के बावजूद प्राइस बढ़ाए। एक प्रमुख ई-कॉमर्स कंपनी ने स्वीकार किया कि यह “तकनीकी गड़बड़ी” के चलते हुआ और अब सुधार कर लिया गया है। वहीं, Flipkart ने कहा कि उन्होंने उपभोक्ताओं तक लाभ पहुँचाने के लिए कई तकनीकी बदलाव किए हैं। लेकिन Amazon, Blinkit और Zepto की तरफ से कोई स्पष्ट जवाब नहीं आया है।
एंटी-प्रॉफिटिंग कानून की चुनौती
दरअसल, फिलहाल GST कानून में ऐसा कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है जो कंपनियों को मुनाफाखोरी (Profiteering) से रोक सके। पहले इसके लिए नेशनल एंटी-प्रॉफिटिंग अथॉरिटी (NAA) थी, लेकिन 2022 में इसे खत्म कर दिया गया। बाद में यह जिम्मेदारी CCI (Competition Commission of India) और फिर GSTAT को दी गई। लेकिन 1 अप्रैल 2025 से यह प्रावधान भी खत्म हो चुका है। ऐसे में कंपनियों पर कानूनी दबाव सीमित हो गया है।
क्यों नहीं कम हुए दाम?
विशेषज्ञों का कहना है कि छोटे रिटेलर्स पुराना स्टॉक निकालने के लिए दाम घटाने में समय ले रहे हैं। वहीं बड़े ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स तकनीकी या रणनीतिक कारणों से उपभोक्ताओं तक सीधा लाभ नहीं पहुँचा पाए। हालांकि, सरकार का मानना है कि टैक्स कटौती का लाभ तुरंत ग्राहकों तक पहुँचना चाहिए और कीमतें बढ़ाने का कोई औचित्य नहीं है।
RBI की नई नीतियाँ
इसी बीच, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रुपए को वैश्विक लेन-देन में मजबूत बनाने के लिए नए कदम उठाए हैं। अब भारत के ऑथराइज्ड डीलर बैंक भूटान, नेपाल और श्रीलंका में भारतीय रुपए (INR) में कर्ज दे सकेंगे। साथ ही वॉस्ट्रो अकाउंट्स में जमा राशि को कॉर्पोरेट बॉन्ड और कमर्शियल पेपर्स में इन्वेस्ट करने की अनुमति दी गई है। इन नीतियों का उद्देश्य डॉलर पर निर्भरता कम करना और रुपए को अंतरराष्ट्रीय लेन-देन में मजबूत बनाना है।
GST दरों में कटौती का असली लाभ आम आदमी तक पहुँचेगा या नहीं, यह आने वाले समय में साफ होगा। फिलहाल सरकार निगरानी बढ़ा रही है और उपभोक्ताओं को भरोसा दिला रही है कि उनकी जेब पर भार नहीं बढ़ने दिया जाएगा।





