February 11, 2026 5:19 AM

GST Bachat Utsav: दिवाली से पहले सरकार का बड़ा तोहफ़ा, टैक्स कम क्यों किया गया और इसका असर क्या होगा?

GST Bachat Utsav: दिवाली का मौसम आते ही बड़ी-बड़ी कंपनियाँ “बिग बिलियन डे”, “महा बचत”, “ग्रेट सेल” जैसी ऑफर स्कीम्स लेकर आती हैं। लेकिन इस बार मामला ज़रा हटके है — क्योंकि कंपनियों के साथ अब खुद सरकार भी बचत का ऑफर लेकर आई है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

EDITED BY: Vishal Yadav

UPDATED: Saturday, October 4, 2025

GST Bachat Utsav: दिवाली से पहले सरकार का बड़ा तोहफ़ा, टैक्स कम क्यों किया गया और इसका असर क्या होगा?

GST Bachat Utsav: दिवाली का मौसम आते ही बड़ी-बड़ी कंपनियाँ “बिग बिलियन डे”, “महा बचत”, “ग्रेट सेल” जैसी ऑफर स्कीम्स लेकर आती हैं। लेकिन इस बार मामला ज़रा हटके है — क्योंकि कंपनियों के साथ अब खुद सरकार भी बचत का ऑफर लेकर आई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शाम 5 बजे घोषणा की — “GST बचत उत्सव का आनंद लें, टैक्स घटा दिया गया है, जमकर शॉपिंग करें।”

अब सवाल उठता है — सरकार तो हमेशा टैक्स बढ़ाती है, फिर इस बार घटाया क्यों?
क्या ये जनता के लिए प्यार का इज़हार है, या फिर चुनावी तैयारी?
आइए जानते हैं GST की पूरी कहानी — इसके इतिहास से लेकर हालिया बदलाव तक।

GST से पहले क्या होता था?

GST आने से पहले देश में 17 तरह के टैक्स और 13 अलग-अलग सेस थे।
हर राज्य का अपना टैक्स था —
कपड़ों पर कहीं 5%, कहीं 10%, तो कहीं 12%।
राज्यों के बीच माल आने-जाने पर “चुंगी नाके” लगते थे, जिससे ट्रकों की लाइनें लग जाती थीं।

इस टैक्स व्यवस्था में “टैक्स पर टैक्स” लगता था।
एक ही वस्तु पर चार बार टैक्स लग जाता था —
गुजरात से एमपी, फिर यूपी तक पहुंचते-पहुंचते दाम दोगुने हो जाते थे।
यानी भारत एक “एकीकृत बाज़ार” नहीं था, बल्कि कई छोटे बाज़ारों में बँटा हुआ था।

GST आया कैसे?

2000 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने GST का प्रस्ताव रखा।
कांग्रेस ने विरोध किया।
फिर 2004 में कांग्रेस सत्ता में आई तो बीजेपी ने विरोध किया।
लेकिन 2017 में मोदी सरकार ने तमाम विवादों और विरोध के बीच 1 जुलाई 2017 को GST लागू कर दिया।

विपक्ष ने इसे “गब्बर सिंह टैक्स” कहा, लेकिन सरकार ने इसे “एक देश, एक टैक्स” की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया।

GST काउंसिल क्या है?

जीएसटी लागू होने के बाद यह तय करने के लिए कि किस चीज़ पर कितना टैक्स लगेगा, बनी जीएसटी काउंसिल
इसमें केंद्रीय वित्त मंत्री चेयरमैन होते हैं और सभी राज्यों के वित्त मंत्री इसके सदस्य।
काउंसिल यह तय करती है कि टैक्स का कितना हिस्सा केंद्र को मिलेगा और कितना राज्य को।

वर्तमान प्रणाली में टैक्स दो हिस्सों में बंटता है:

  • CGST (Central GST) – केंद्र सरकार को

  • SGST (State GST) – राज्य सरकार को

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What is GST Applicability?

हालिया बदलाव: क्या-क्या सस्ता हुआ है?

पहले जीएसटी के पाँच स्लैब थे — 0%, 5%, 12%, 18% और 28%।
अब सरकार ने सिस्टम को सरल बनाते हुए सिर्फ दो मुख्य स्लैब रखे हैं – 5% और 18%।

इस बदलाव के तहत:

  • कई 12% वाले उत्पाद 5% पर आ गए।

  • कई 28% वाले उत्पाद 18% पर आ गए।

  • कुछ आवश्यक वस्तुएँ 0% यानी पूरी तरह टैक्स-फ्री कर दी गईं।

सस्ती हुई चीज़ें:

  • आटा, पैक्ड स्नैक्स, साबुन, डिटर्जेंट, टूथपेस्ट

  • टीवी, फ्रिज, एसी जैसी घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स

  • हेल्थ और टर्म इंश्योरेंस – पहले 18% जीएसटी, अब 0%

  • सीमेंट और बिल्डिंग मटेरियल्स – 28% से 18%

  • मार्बल, ग्रेनाइट, ईंटें – 12% से 5%

  • खेती के उपकरण और पेस्टिसाइड्स – 12% से 5%

  • कपड़ा उद्योग में मैनमेड फाइबर – 18% से 5%

  • होटल रूम्स (₹7500 से कम) – अब सिर्फ 5%

  • सैलून और जिम सर्विसेज़ – 18% से 5%

Components of GST - CGST, SGST, UTGST and IGST Explained

हेल्थ और इंश्योरेंस सेक्टर को राहत

भारत में करोड़ों लोग आज भी इंश्योरेंस नहीं लेते क्योंकि प्रीमियम पर जीएसटी बहुत ज़्यादा था।
सरकार ने अब हेल्थ और टर्म इंश्योरेंस पर जीएसटी शून्य कर दिया है।
इससे लाखों लोगों को मेडिकल कवरेज लेना आसान होगा और बीमा क्षेत्र में नई तेजी आएगी।

ऑटो सेक्टर को भी बड़ा फायदा

कई कारें जो पहले 28% टैक्स स्लैब में थीं, अब 18% पर आ गई हैं।
इससे वाहनों की कीमतों में लाखों रुपये की बचत होगी।
इलेक्ट्रिक व्हीकल्स और पब्लिक ट्रांसपोर्ट (रिक्शा, बसें) पर भी टैक्स घटाया गया है।

हाउसिंग और कंस्ट्रक्शन में नई जान

सीमेंट, ईंट, टाइल्स, ग्रेनाइट सब सस्ते हो गए हैं।
इससे घर बनाने की लागत कम होगी और रियल एस्टेट सेक्टर को बूस्ट मिलेगा।
सरकार चाहती है कि कंस्ट्रक्शन बढ़े — क्योंकि यह सबसे बड़ा रोजगार देने वाला क्षेत्र है।

कृषि क्षेत्र को भी राहत

खेती में इस्तेमाल होने वाले उपकरण, ट्रैक्टर, सिंचाई मशीनें, और पेस्टिसाइड्स अब पहले से काफी सस्ते हो गए हैं।
इससे किसानों की जेब में सीधी राहत पहुंचेगी।

GST collection spikes 8.5% Y-o-Y in November at Rs 1.82 trillion, ETCFO

सरकार ने टैक्स क्यों घटाया?

इस “जीएसटी बचत उत्सव” के पीछे सरकार की तीन बड़ी वजहें हैं:

  1. सिस्टम को सरल बनाना:
    इतने टैक्स स्लैब और नियम थे कि व्यापारी और टैक्स विभाग दोनों परेशान थे।
    सरकार ने विवाद और जटिलता को कम करने के लिए यह कदम उठाया।

  2. कंज़म्प्शन बढ़ाना:
    लोगों के हाथ में ज़्यादा पैसा आने से बाजार में खर्च बढ़ेगा।
    इससे अर्थव्यवस्था को 2 लाख करोड़ रुपये का बूस्ट मिलने की उम्मीद है।

  3. रोजगार सृजन:
    टैक्स राहत उन सेक्टरों को दी गई है जो सबसे ज़्यादा नौकरियाँ पैदा करते हैं —
    जैसे कंस्ट्रक्शन, ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल और कृषि।

आम आदमी को क्या फायदा होगा?

  • रोजमर्रा की चीज़ें सस्ती होंगी

  • हेल्थ इंश्योरेंस लेना आसान होगा

  • गाड़ियाँ, घर और होटल सस्ते मिलेंगे

  • रोजगार के नए अवसर खुलेंगे

  • महंगाई पर नियंत्रण मिलेगा

जीएसटी बचत उत्सव सिर्फ एक टैक्स रिफॉर्म नहीं, बल्कि भारत की अर्थव्यवस्था में नई जान फूंकने की कोशिश है।
सरकार ने यह दिखाया है कि जब व्यवस्था आसान हो, तो आम आदमी भी राहत महसूस करता है।
अब देखना ये होगा कि यह कदम जनता की जेब में राहत देता है या चुनावी फायदा।
फिलहाल तो इतना तय है — इस दिवाली न सिर्फ बाजार, बल्कि पूरा भारत बचत का उत्सव मनाएगा।

GST Bachat Utsav begins but investors have already made money. Is the auto  & consumer rally over? - The Economic Times

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