Gold and Silver Prices: पिछले कुछ हफ्तों में सोना और चांदी के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं, और निवेशकों की निगाहें इन दोनों बहुमूल्य धातुओं पर टिक गई हैं। 27 सितंबर को भारत में 10 ग्राम 24 कैरेट गोल्ड की कीमत ₹1,23,199 थी — यानी सिर्फ 10 दिनों में करीब ₹16,000 का इजाफा, जो लगभग 14% की छलांग है। यह सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि ग्लोबल मार्केट में भी देखा गया है, जहां सोना $4,000 प्रति आउंस के पार पहुंच गया है।
सेंट्रल बैंक्स की बढ़ती खरीद
दामों में इस उछाल का सबसे बड़ा कारण है दुनिया भर के सेंट्रल बैंक्स द्वारा गोल्ड की खरीदारी। चीन, जो पहले सालाना 2500 से 3000 किलो सोना खरीदता था, अब अचानक 2024 में 30,000 से 40,000 किलो तक सोना खरीद रहा है। भारत के गोल्ड रिज़र्व्स भी मार्च 2020 के 650 टन से बढ़कर 880 टन तक पहुंच चुके हैं।
इससे साफ है कि जब दुनिया आर्थिक संकट या युद्ध के माहौल में होती है, तो देश गोल्ड को सेफ एसेट के रूप में खरीदते हैं क्योंकि उस पर किसी सरकार का नियंत्रण नहीं होता।
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जियोपॉलिटिकल तनाव और डॉलर की कमजोरी
रूस-यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट की अस्थिरता और अमेरिका-चीन व्यापार तनाव जैसी घटनाओं ने निवेशकों का भरोसा पारंपरिक करेंसी से हटा दिया है। ऐसे माहौल में गोल्ड एक सेफ हेवन की तरह काम करता है।
इसके अलावा, यूएस फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती के बाद डॉलर कमजोर हुआ है, जिससे गोल्ड के दाम और चढ़ गए हैं।
भारतीय रुपये का प्रभाव
भारत में सोना डॉलर में खरीदा जाता है। रुपये के कमजोर होने से सोने के दाम और बढ़ जाते हैं। पिछले 30 सालों में गोल्ड ने डॉलर के हिसाब से 7.6% रिटर्न दिया है, जबकि भारतीय रुपये में यह 11% तक का रिटर्न बन गया है।
Silver Prices भी चमके — ‘New Gold’ बनती चांदी
जहां सोने ने नया रिकॉर्ड बनाया है, वहीं चांदी भी पीछे नहीं। आज 1 किलो चांदी की कीमत ₹1,57,000 तक पहुंच चुकी है। 10 दिन पहले यह ₹1,49,000 थी — यानी 6% की वृद्धि।

इंटरनेशनल मार्केट में सिल्वर ने इस साल 60% तक रिटर्न दिया है। 2020 में जो चांदी ₹45,000 प्रति किलो थी, आज वह तीन गुना बढ़ चुकी है।
इंडस्ट्रियल डिमांड और सप्लाई की कमी
चांदी की कीमतें सिर्फ निवेश से नहीं, बल्कि इंडस्ट्रियल डिमांड से भी प्रभावित होती हैं। सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, सेमीकंडक्टर और मेडिकल डिवाइस में सिल्वर का उपयोग तेजी से बढ़ा है।
रिपोर्ट्स बताती हैं कि सिल्वर लगातार 6 महीने से सप्लाई डेफिसिट में है, यानी मांग बढ़ रही है लेकिन उत्पादन सीमित है।
निवेशकों के लिए चेतावनी
एक्सपर्ट्स का कहना है कि गोल्ड और सिल्वर दोनों वोलाटाइल एसेट्स हैं। निवेश करते समय सावधानी जरूरी है।
कुल पोर्टफोलियो का 10-15% गोल्ड में और 5-10% सिल्वर में रखना बेहतर माना गया है।
गोल्ड और सिल्वर की बढ़ती कीमतें ग्लोबल तनाव, डॉलर की कमजोरी और सेंट्रल बैंक्स की नीतियों से जुड़ी हैं। लेकिन जितनी तेजी से ये आसमान छूते हैं, उतनी ही जल्दी गिर भी सकते हैं। इसलिए निवेश करते समय संतुलन बनाए रखना जरूरी है।
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