Gautam Adani Land Lease: अडानी ग्रुप के प्रमुख Gautam Adani एक बार फिर विवादों में हैं। आरोप है कि बिहार के भागलपुर जिले के पीरपैती में उन्हें 1050 एकड़ जमीन महज ₹1 की वार्षिक लीज पर दे दी गई है। दावा किया जा रहा है कि यह लीज अगले 33 सालों के लिए फाइनल हो चुकी है।
15 सितंबर को कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर यह खुलासा किया। उनका कहना था कि इतनी बड़ी जमीन पावर प्लांट बनाने के लिए अडानी ग्रुप को दी गई है और इसके बदले उन्हें हर साल सिर्फ ₹1 देना होगा। खेड़ा ने आगे आरोप लगाया कि इस जमीन पर करीब 10 लाख आम, लीची और सागौन के पेड़ लगे हैं और वह भी इस लीज में शामिल कर दिए गए हैं।
उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक वीडियो भी दिखाया जिसमें स्थानीय लोग रोते-बिलखते दिखाई दे रहे थे। ग्रामीणों का दावा है कि उनकी जमीन और उस पर लगे पेड़ कौड़ियों के भाव में छीन लिए गए हैं।
उनके दिखाए वीडियो में स्थाननीय लोग ये कहते हुए नज़र आये कि हमारी कोई नहीं सुन रहा है और अगर कुछ कहते है तो पुलिस थाने पे बुलाया जाता है।
Gautam Adani Land Lease विवाद: कांग्रेस के आरोप और चुनावी संदर्भ
पवन खेड़ा ने कहा कि यह मामला नया नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावों से ठीक पहले बार-बार अडानी ग्रुप को बड़े प्रोजेक्ट्स दिए जाते हैं। उदाहरण के तौर पर उन्होंने महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव से पहले अडानी को पावर प्रोजेक्ट और धारावी प्रोजेक्ट दिए जाने का दावा किया।
इसी तरह झारखंड में विधानसभा चुनाव से पहले गोड्डा पावर प्रोजेक्ट और छत्तीसगढ़ में 2013 के चुनाव से पहले हसदेव अरण्य प्रोजेक्ट अडानी ग्रुप को दिया गया था। खेड़ा ने कहा कि जब भी चुनाव करीब आते हैं, बीजेपी सरकार अडानी समूह को लाभ पहुंचाती है।
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केंद्र सरकार और प्रोजेक्ट की लागत
कांग्रेस प्रवक्ता ने आगे बताया कि केंद्र सरकार के बजट में 400 मेगावाट बिजली प्रोजेक्ट की घोषणा की गई थी, जिसकी लागत लगभग ₹21,400 करोड़ बताई गई थी। लेकिन तब यह जानकारी नहीं दी गई थी कि यह प्रोजेक्ट किसी प्राइवेट कंपनी को सौंपा जाएगा।
बीजेपी का पक्ष
इन आरोपों पर बिहार बीजेपी के मीडिया विभाग के प्रमुख दानिश इकबाल ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि पूरा प्रोसेस पारदर्शिता के साथ टेंडर के जरिए किया गया है। अडानी ग्रुप ने सबसे कम दर पर बिजली उपलब्ध कराने की पेशकश की, इसलिए उन्हें यह प्रोजेक्ट दिया गया।
दानिश इकबाल ने कहा, “पूरा इन्वेस्टमेंट अडानी ग्रुप कर रहा है। सरकार सिर्फ जमीन उपलब्ध करा रही है। इसमें किसी तरह का भ्रष्टाचार या घोटाला नहीं है।”
जब उनसे पूछा गया कि क्या जमीन महज ₹1 की सालाना लीज पर दी गई है, तो उन्होंने इसे स्वीकार किया लेकिन साथ ही कहा कि इससे बिहार को सबसे कम दर पर बिजली मिलेगी, जो विकास के लिए ज़रूरी है।
अब देश की मिट्टी भी अडानी की है। पवन खेड़ा @Pawankhera का यह खुलासा चौंकाने वाला तो है ही नेशनल सेठ अडानी के नाम पर किए जा रहे राष्ट्रव्यापी भ्रष्टाचार का जीता जागता नमूना है।
सरकार ने भागलपुर में 1050 एकड़ जमीन 33 वर्षों के लिए गौतम अडानी को दे दी गई। लूट का आलम देखिए यह भूमि… pic.twitter.com/YBhDfqKCVD
— Awesh Tiwari (@awesh29) September 15, 2025
किसानों और पर्यावरण को लेकर सवाल
इस मामले में सबसे बड़ा विवाद किसानों और पेड़ों को लेकर है। कांग्रेस का दावा है कि 10 लाख से ज्यादा पेड़ों वाली जमीन को सस्ते में दे दिया गया। बीजेपी का कहना है कि खाली जमीन पर पेड़-पौधे स्वाभाविक रूप से होते हैं और ऐसे आरोप बेबुनियाद हैं।
राजनितिक पार्टियाँ एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप करती रहती है लेकिन इसके बीच में सच्चाई ये है कि जो पेड़ उस जमीन पर बताये जा रहे है क्या उसे काटना सही होगा, क्या उसका गलत प्रभाव प्रकृति पर नहीं होगा। और कथित 10 लाख पेड़ कोई छोटी संख्या नहीं होती, जहा एक पेड़ काटने पर वन विभाग लोगो को नोटिस भेज देता है वह इस तरह की घटना पर क्या एक्शन नहीं होना चाहिए?
यह पूरा मामला राजनीतिक और आर्थिक दोनों ही दृष्टि से महत्वपूर्ण है। एक ओर कांग्रेस इस जमीन सौदे को भ्रष्टाचार और पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने वाला कदम बता रही है, वहीं बीजेपी इसे विकास और सस्ती बिजली से जोड़ रही है।
स्थाननीय लोगो का कहना ये भी है की उन्हें वो मुआबजा नहीं मिल रहा है जो मिलना चाहिए और 1 रुपये प्रतिवर्ष पर जमीन लेकर क्या अडानी ग्रुप उस प्लांट पर बनायीं हुयी बिजली फ्री में लोगों को देगा या फिर फ्री में जमीन लेने के बाद भी वही लोग जिसकी जमीन उस प्लांट के लिए लिया गया उन्ही से 6 – 10 रुपये प्रति यूनिट लिया जायेगा। इस खबर की आगि की बिल्डप पर हमारी रिपोर्ट आती रहेगी तब तक दूसरी खबरों को पढ़ते रहे।






