February 11, 2026 6:56 AM

Donald Trump Nobel Peace Prize 2025: ट्रंप को नहीं मिला नोबेल पीस प्राइज, वेनेजुएला की अपोजिशन लीडर मारिया कोरिना मचाडो बनीं विजेता !!

Donald Trump Nobel Peace: Donald Trump को नहीं मिला Nobel Peace Prize! वेनेजुएला की अपोजिशन लीडर मारिया कोरिना मचाडो बनीं विजेता

EDITED BY: Vishal Yadav

UPDATED: Friday, October 10, 2025

Donald Trump Nobel Peace Prize 2025: ट्रंप को नहीं मिला नोबेल पीस प्राइज, वेनेजुएला की अपोजिशन लीडर मारिया कोरिना मचाडो बनीं विजेता !!

Donald Trump Nobel Peace: नॉर्वेजियन कमेटी ने इस साल के नोबेल पीस प्राइज का ऐलान कर दिया है और लंबे इंतजार के बाद यह सम्मान गया वेनेजुएला की अपोजिशन लीडर मारिया कोरिना मचाडो के नाम. उन्हें यह पुरस्कार मिला है अपने देश में डेमोक्रेटिक राइट्स को बढ़ावा देने, महिलाओं के हित में काम करने, और तानाशाही शासन के खिलाफ संघर्ष करने के लिए. लेकिन चर्चा का केंद्र इस बार मारिया मचाडो से ज्यादा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बन गए हैं जिन्हें यह पुरस्कार नहीं मिला.

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ट्रंप को नहीं इस महिला को मिला नोबेल शांति पुरस्कार - Maria kurina Machado  gets NOBEL PEACE PRIZE FOR WORK IN VENEZUELA ntc - AajTak

क्यों डोनाल्ड ट्रंप को इस बार भी नहीं मिला नोबेल शांति पुरस्कार? जानें कमेटी ने किसे और क्यों चुना

ट्रंप लंबे समय से खुद को इस अवॉर्ड का दावेदार बता रहे थे. उन्होंने दावा किया था कि उन्होंने कई देशों के बीच शांति स्थापित करवाई है — जिनमें इजराइल, गाजा, भारत-पाकिस्तान और ईरान जैसे देश शामिल हैं. यहां तक कि उन्होंने कहा था कि अगर उनका नाम “ओबामा” होता तो उन्हें अब तक दस बार यह पुरस्कार मिल चुका होता. उन्होंने खुद को शांति स्थापित करने वाला नेता बताया और कहा कि उन्होंने “छह-सात जंगें रुकवाई हैं.”

नोबेल कमेटी के ऐलान से एक दिन पहले ही गाजा में शांति समझौते और होस्टेजेस रिलीज़ पर सहमति बनी थी, जिसके बाद ऐसा माना जा रहा था कि ट्रंप इस बार नोबेल के बड़े दावेदारों में रहेंगे. कई देशों जैसे रूस, पाकिस्तान और कुछ अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने उन्हें नोमिनेट भी किया था. लेकिन इसके बावजूद ट्रंप को यह सम्मान नहीं मिला.

वहीं दूसरी तरफ, मारिया कोरिना मचाडो की जीत को दुनियाभर में सराहा जा रहा है. वह वेनजुएला की एक प्रख्यात इंजीनियर हैं, जो बाद में राजनीति में सक्रिय हुईं. वह देश की डिप्टी मिनिस्टर रह चुकी हैं और लंबे समय तक वेनेजुएला की तानाशाही सरकार के खिलाफ छिपकर भी संघर्ष करती रहीं. उन्होंने लोकतंत्र की बहाली और महिलाओं की स्वतंत्रता के लिए लगातार आवाज उठाई, जिसके लिए अब उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह बड़ा सम्मान मिला है.

Donald Trump threatens to invoke 200-year-old Insurrection Act to deploy  troops

अब सबकी नजरें ट्रंप के रिएक्शन पर, क्या नोबेल कमेटी के फैसले पर उठाएंगे सवाल?

राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह जीत सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं बल्कि वेनजुएला के लोगों की जीत है, जो सालों से स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं. वहीं ट्रंप के समर्थक सोशल मीडिया पर नाराजगी जता रहे हैं और कई लोग इस फैसले को “पक्षपातपूर्ण” बता रहे हैं.

मारिया मचाडो को यह पुरस्कार 125वां नोबेल पीस प्राइज के रूप में दिया जाएगा. आधिकारिक वितरण समारोह 10 दिसंबर को ऑस्लो, नॉर्वे में आयोजित होगा, जहां दुनियाभर की नजरें इस मंच पर होंगी.

अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि डोनाल्ड ट्रंप का रिएक्शन क्या होगा, क्योंकि वे इस अवॉर्ड को लेकर लगातार सक्रिय रहे हैं और खुद को पीस डील्स का निर्माता बताते हैं. फिलहाल ट्रंप को चार देशों से नॉमिनेशन और कुछ संगठनों से समर्थन जरूर मिला, लेकिन इस बार यह पुरस्कार उनके हाथ से निकल गया.

मारिया मचाडो की जीत के साथ नोबेल कमेटी ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि शांति और लोकतंत्र के लिए काम करने वालों को ही सम्मान मिलता है, चाहे वे किसी भी देश से हों. अब दुनिया देखना चाहती है कि ट्रंप इस फैसले पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और क्या वे अगली बार फिर से अपनी दावेदारी पेश करेंगे या नहीं.

Amid shutdown fight, Trump no longer distancing himself from Project 2025 |  PBS News

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