हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर बड़े-बड़े इंडिपेंडेंट न्यूज़ क्रिएटर्स, एक्सप्लेनर्स और एजुकेशनल वीडियो बनाने वाले क्रिएटर्स दिल्ली के अंदर मास किडनैपिंग की बात कर रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि इसमें बच्चे, महिलाएं और यहां तक कि पुरुष भी शामिल हैं। कहीं आंकड़ा 800 पार बताया जा रहा है, तो कहीं 1000 के करीब होने की बात कही जा रही है। कई जगह न्यूज़ रिपोर्ट्स का भी हवाला दिया जा रहा है।
इन दावों को देखने के बाद लोगों में डर का माहौल है। लोग सोचने पर मजबूर हैं। खासकर वो माता-पिता जिनके छोटे बच्चे शाम के वक्त या रात में ट्यूशन या कोचिंग जाया करते हैं, वो बेहद परेशान नजर आ रहे हैं।
अब सवाल उठता है— क्या ये सच है?
अगर हां, तो इस खबर में कितनी सच्चाई है? आज हम बहुत आराम से और अच्छे रिसर्च के बाद इस पूरे मामले को समझने की कोशिश करेंगे।
आज की रिपोर्ट में कुछ अहम सवाल होंगे—
- क्या है दिल्ली किडनैपिंग केस?
- ये मामला इतनी जल्दी लाइमलाइट में कैसे आया?
- सोशल मीडिया और रील्स में कही जा रही बातें कितनी सच हैं?
- इस पूरे मामले पर पुलिस प्रशासन क्या कह रहा है?
- दिल्ली सरकार का इस पर क्या स्टैंड है?
- अगर मामला सच है, तो सरकार और पुलिस जनता को क्या आश्वासन दे रही है?
इन सभी सवालों पर विस्तार से बात होगी।
मेरा नाम है विशाल, आप पढ़ रहे हैं The Lokdhara, इसी के साथ आज की रिपोर्ट शुरू करते हैं और समझते हैं— “Delhi Mass Kidnapping Case”
क्या है दिल्ली किडनेपिंग केस (Delhi Mass Kidnapping Case) ?

यह मामला शुरू हुआ दिल्ली पुलिस की तरफ़ से आई एक 15 दिनों की रिपोर्ट से, जिसमें 2026 के शुरुआती 15 दिनों में दर्ज हुई मिसिंग कंप्लेंट्स का ज़िक्र था। उस डेटा में दिल्ली पुलिस ने बताया कि 1 से 15 जनवरी के अंतराल में कुल 807 मिसिंग कंप्लेंट्स दर्ज हुईं। यानी 807 लोग या तो किडनैप हुए या लापता हुए।
इनमें 298 पुरुष और 509 महिलाएं शामिल थीं। उसी रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि इनमें कुल 191 नाबालिग थे, जिनमें 45 बच्चे और 146 बच्चियां शामिल थीं।
इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद इंस्टाग्राम रील्स से लेकर न्यूज़ चैनलों तक और अख़बारों में छपे आर्टिकल्स में दिल्ली को लापताग़ंज कहा जाने लगा। मोटे तौर पर देखा जाए तो 15 दिनों में इतना बड़ा आंकड़ा किसी को भी चौंका सकता है। दिल्ली में लोग इस तरह गायब हो रहे हैं और किसी को कोई ख़बर नहीं है।
यह मामला शायद रिपोर्ट्स तक ही सीमित रह जाता, अगर कुछ सोशल मीडिया क्रिएटर्स—जो न्यूज़ कवर करते हैं और लोगों को जागरूक करने वाला कंटेंट बनाते हैं—इसे उठाते नहीं। रील्स में क्रिएटर्स ने आज तक जैसे बड़े-बड़े प्लेटफॉर्म्स में छपी खबरों का हवाला दिया। इसके बाद पूरी डिजिटल न्यूज़ मीडिया और मेनस्ट्रीम मीडिया ने इस मुद्दे पर बात की, जिससे लोगों को इस मामले के बारे में और जानकारी मिली।
अब सवाल यह है कि 2026 के शुरुआती 15 दिनों के आंकड़े इस तरह है तो आगे के आकड़ों में क्या होगा? अगर वाकई कोई किडनैपिंग गिरोह सक्रिय है, तो आने वाले समय में स्थिति कितनी गंभीर हो सकती है?
Delhi Mass Kidnapping Case
पुलिस को कितने लोग वापस मिले ?
कंप्लेंट्स दर्ज होने के बाद पुलिस ने अपना काम किया और उसी रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 807 लोगों में से 235 लोगों को पुलिस ने ढूंढ लिया है, या यूं कह सकते हैं कि वे वापस आ गए हैं। मैं ऐसा क्यों कह रहा हूं, इसका जवाब आपको आगे रिपोर्ट में खुद मिल जाएगा।
वापस आए लोगों में 115 पुरुष और 120 महिलाएं शामिल हैं, जिनमें 25 बच्चे और 29 बच्चियां भी शामिल हैं। हालांकि, अभी भी दिल्ली पुलिस को 807 में से 572 लोगों को ढूंढना बाकी है, जो अब भी न जाने कहां गुम हैं।
इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद पूरे भारत में हलचल मच गई। लोगों के मन में सवाल उठने लगे कि अगर भारत के दिल यानी दिल्ली में यह सब आम होता जा रहा है—जहां प्रधानमंत्री से लेकर बड़े-बड़े नेता, ब्यूरोक्रेट्स और न जाने कितनी बड़ी हस्तियां रहती हैं—तो देश के दूसरे हिस्सों में हालात क्या होंगे। सवाल गंभीर है, लेकिन इस पूरी हलचल के बाद दिल्ली पुलिस क्या कह रही है, इसे भी समझना जरूरी है।
दिल्ली मामले में पुलिस की तरफ से क्या प्रतिक्रिया आयी ?
इस मामले में मची हलचल और सोशल मीडिया पर हुए बवाल के बाद दिल्ली पुलिस ने अपने ऑफिशियल सोशल मीडिया हैंडल से 05 फ़रवरी 2026 को एक वीडियो साझा किया। इस वीडियो में संयुक्त पुलिस आयुक्त / जन संपर्क अधिकारी संजय त्यागी ने लोगों से न घबराने की अपील की।
उन्होंने कहा कि जनवरी 2026 में पिछले वर्षों के आंकड़ों के मुकाबले गुमशुदगी के मामलों में गिरावट देखने को मिली है, न कि कोई वृद्धि।
इसी वीडियो के साथ दिल्ली पुलिस की तरफ़ से कैप्शन में लिखा गया— “हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि गुमशुदगी, विशेषकर बच्चों के लापता होने को लेकर फैलाई जा रही अफवाहों से घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है। विगत वर्षों की तुलना में गुमशुदगी के मामलों में वृद्धि नहीं हुई है। दिल्ली पुलिस त्वरित जांच व कार्रवाई के साथ नागरिकों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।”
दिल्ली पुलिस ने यह भी साफ किया कि अपराधों और लापता मामलों की रिपोर्टिंग पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से की जाती है, जिससे किसी भी तरह की जानकारी छुपाना या उसमें छेड़छाड़ करना संभव नहीं है। आप दिल्ली पुलिस की तरफ से आयी पूरी रिपोर्ट को नीचे फोटो पर क्लिक करके देख सकते है।
दिल्ली के अपहरण मामले में दिल्ली पुलिस का ऑफिसियल बयां आ गया है, पुलिस का कहना है की घबराने की कोई जरूरत नहीं है अचानक से कोई गिरोह सक्रिय नहीं हुआ है सब सामान्य है !!#DelhiPolice #crime #Delhi pic.twitter.com/NyjcjQUATq
— The Lok Dhara (@thelokdhara) February 6, 2026
दिल्ली किडनेपिंग मामले में कितनी सच्चाई है ?
यह बात सच है कि दिल्ली में 2026 के शुरुआती 15 दिनों में 800 से ज़्यादा बच्चे, महिलाएं और पुरुष गायब हुए हैं। लेकिन यहां कुछ बातें स्पष्ट करना ज़रूरी है। यह कोई अचानक या अप्रत्याशित घटना नहीं है।
अगर हम दिल्ली पुलिस के ही पिछले सालों के आंकड़ों को देखें, तो उनके मुकाबले कोई असामान्य स्पाइक देखने को नहीं मिलता। हां, पंद्रह दिनों के आंकड़ों को देखकर ऐसा लगता है कि आठ सौ का नंबर बहुत बड़ा है, लेकिन अगर पुराने आंकड़ों से तुलना करें, तो पिछले सालों में भी शुरुआती पंद्रह दिनों में लगभग इतने ही लोग लापता हुए हैं।
अब सवाल यह है कि इतनी ज़्यादा मिसिंग कंप्लेंट्स आती क्यों हैं?
इसका एक बड़ा कारण सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, अगर कोई नाबालिग—यानी 18 साल से कम उम्र का बच्चा, लड़का या लड़की—घर से अपनी मर्जी से भी कहीं चला जाता है या गायब हो जाता है, तो उसकी शिकायत मिसिंग नहीं बल्कि किडनैपिंग के तहत दर्ज की जाती है।
यानि एफआईआर में उसे किडनैपिंग या ट्रैफिकिंग की धारा में ही लिखना होता है, ताकि उस मामले को सबसे ज़्यादा प्राथमिकता मिल सके और सर्च ऑपरेशन तेज़ी से किया जाए। इसी वजह से कई ऐसे मामले, जिनमें बच्चे खुद से कहीं चले जाते हैं या कुछ दिनों में वापस आ जाते हैं, वो भी किडनैपिंग के आंकड़ों में शामिल हो जाते हैं।

इसी कारण किडनैपिंग का आंकड़ा थोड़ा ज़्यादा दिखाई देता है। लेकिन इसे लेकर जिस तरह अचानक मीडिया, यूट्यूब क्रिएटर्स और सोशल मीडिया पर पैनिक फैलाया गया, वो ज़रूरत से ज़्यादा था।
यह फैक्ट है कि आठ सौ से ज़्यादा लोग गायब हुए हैं, लेकिन यह भी उतना ही सच है कि यह कोई नई या अचानक पैदा हुई स्थिति नहीं है। न तो इसमें कोई बहुत बड़ा उछाल आया है और न ही कोई असामान्य गिरावट देखने को मिली है। आंकड़े लगभग वैसे ही हैं जैसे पहले के सालों में रहे हैं।
कुछ लोग यह भी कह सकते हैं कि वे नहीं चाहते कि एक भी मामला सामने आए, और यह बात सही भी है। लेकिन जिस तरह से यह नैरेटिव बनाया गया कि दिल्ली में कोई किडनैपिंग गिरोह या संगठन अचानक सक्रिय हो गया है, जो लोगों और बच्चों को मास लेवल पर किडनैप कर रहा है—यह बात हकीकत से ज़्यादा अफवाह जैसी है।
ऐसा कोई प्रमाण नहीं है कि कोई नया गिरोह अचानक एक्टिव हुआ हो, जो सडन किडनैपिंग या ट्रैफिकिंग कर रहा हो। दिल्ली पुलिस ने भी साफ़ कहा है कि घबराने की कोई ज़रूरत नहीं है। बड़ी संख्या में जो लोग गायब होते हैं, उन्हें पुलिस ढूंढकर वापस भी लाती है।
हां, कुछ मामले ऐसे होते हैं जहां पुलिस सफल नहीं हो पाती, लेकिन वे गिने-चुने होते हैं। नीचे दी गई इमेजेस और डेटा में आप खुद देख सकते हैं कि पिछले सालों में कितने बच्चे, पुरुष और महिलाएं गायब हुए और कितनों को रिटेन किया गया।
अंत में बस यही कहना है कि पैनिक करने की ज़रूरत नहीं है। ज़रूरत है सतर्कता और जागरूकता की। खासकर छोटे बच्चों के मामले में—
पांच से आठ, दस साल के बच्चे जिनके पास फोन नहीं होता, उन पर ज़्यादा ध्यान देने की ज़रूरत है। बड़े बच्चों के पास अगर फोन होता है तो उन्हें ट्रेस करना थोड़ा आसान होता है।
स्कूल, कोचिंग, ट्यूशन—इन सभी जगहों पर सावधानी बरतना ज़रूरी है। पुलिस पर भरोसा रखें और अगर कोई भी ऐसी घटना होती है, तो तुरंत शिकायत दर्ज कराएं। जितनी जल्दी एफआईआर होगी, उतनी जल्दी पुलिस कार्रवाई कर पाएगी।
जो अफवाह उड़ रही है कि दिल्ली में कोई नया संगठित गिरोह मास किडनैपिंग या ट्रैफिकिंग कर रहा है—ऐसा कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आया है। हालात वैसे ही हैं जैसे पहले थे। इस रिपोर्ट में हमारी फाइंडिंग्स यहीं समाप्त होती हैं। जिन रिपोर्ट्स और दस्तावेज़ों के आधार पर यह जानकारी दी गई है, वे भरोसेमंद है और उनपे भरोसा किया जा सकता है। अपना बहुत ख्याल रखिये और पढ़ते रहिये The Lokdhara






