Delhi Liquor Policy Update: वैधानिक चेतावनी: शराब पीना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।
यह चेतावनी देना जरूरी है क्योंकि आज की खबर जुड़ी हुई है दिल्ली की नई लिकर पॉलिसी (Delhi Liquor Policy 2025) से।
दिल्ली के शौकीनों के लिए यह बड़ी खबर है — अब आपको गुरुग्राम जाकर सस्ती या प्रीमियम शराब खरीदने की जरूरत नहीं पड़ सकती। सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली सरकार अपनी एक्साइज पॉलिसी में बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है, ताकि वह पड़ोसी शहर गुरुग्राम और नोएडा से प्राइस वॉर में मुकाबला कर सके।
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एक्साइज कमेटी की बैठक में बना नया ड्राफ्ट प्लान
Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार, 3 अक्टूबर को एक्साइज कमेटी की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें अधिक ट्रांसपेरेंट और सोशल सिक्योर पॉलिसी लाने पर चर्चा हुई। उम्मीद जताई जा रही है कि नई नीति का ड्राफ्ट अगले एक महीने में तैयार हो जाएगा।
इस बैठक में कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई —
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फिक्स्ड रिटेल मार्जिन कैप में बदलाव
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एक्साइज ड्यूटी स्ट्रक्चर का पुनर्विचार
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बियर पीने की लीगल ऐज में संशोधन
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और दिल्ली में प्रीमियम ब्रांड्स की उपलब्धता बढ़ाने पर प्रस्ताव रखा गया।
दिल्ली बनाम गुरुग्राम — शराब की कीमतों में इतना अंतर क्यों?
असल में, दिल्ली में फिक्स्ड रिटेल मार्जिन कैप लागू है —
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भारत में बनी विदेशी शराब (IMFL) पर ₹50 प्रति बोतल
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इंपोर्टेड लिकर पर ₹100 प्रति बोतल
यानी दुकानदार इससे ज्यादा मुनाफा नहीं कमा सकते।
वहीं गुरुग्राम में ऐसी कोई सीमा नहीं है। वहां शराब विक्रेताओं को डिस्काउंट देने की पूरी आज़ादी है। यही वजह है कि लोग दिल्ली और नोएडा से सस्ते ऑफर्स की तलाश में गुरुग्राम चले जाते हैं।
इसके अलावा, गुरुग्राम में शराब की दुकानों का लाइसेंस नीलामी (auction) के ज़रिए दिया जाता है, जहां व्यापारी बड़ी रकम लगाते हैं और बिक्री बढ़ाने के लिए डिस्काउंट और ऑफर चलाते हैं।

दिल्ली में अब भी सरकारी नियंत्रण
वर्तमान में दिल्ली में कोई प्राइवेट लिकर शॉप नहीं है।
यहां चार सरकारी कॉरपोरेशन करीब 700 आउटलेट्स चलाते हैं। इन दुकानों पर ज्यादातर ₹400 से ₹600 वाली शराब मिलती है, जबकि हाई-एंड या प्रीमियम ब्रांड्स की कमी रहती है।
इसी मुद्दे पर बैठक में प्राइवेट लिकर स्टोर्स की वापसी पर चर्चा हुई है।
नवंबर 2021 में इन्हें फेजवाइज तरीके से बंद कर दिया गया था, जब केजरीवाल सरकार ने नई नीति लागू की थी। हालांकि, भ्रष्टाचार के आरोपों और सीबीआई जांच के बाद यह नीति वापस ले ली गई।
क्या फिर से होगा “नीति का यू-टर्न”?
अब दोबारा प्राइवेट दुकानों की वापसी पर चर्चा यह संकेत देती है कि सरकार को भारी राजस्व नुकसान हो रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब तक दिल्ली सरकार को शराब नीति से जुड़े बदलावों के कारण सैकड़ों करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है।
अगर नई पॉलिसी लागू होती है तो एक बार फिर दिल्ली में प्राइवेट रिटेलर वापसी कर सकते हैं और प्रीमियम ब्रांड्स भी दुकानों में आम हो जाएंगे।
नई लिकर पॉलिसी सिर्फ शराब बेचने की नहीं, बल्कि राजस्व और नीति-संतुलन की लड़ाई बन गई है।
दिल्ली सरकार को जहां पारदर्शिता और सामाजिक जिम्मेदारी दिखानी होगी, वहीं उसे गुरुग्राम जैसी प्रतिस्पर्धा से भी मुकाबला करना होगा।
आने वाले महीने में यह तय होगा कि दिल्ली फिर से “प्रीमियम सिटी” बनेगी या नहीं।






