February 11, 2026 3:51 AM

Communal Harmony India: ‘मैं पहले इंसान हूं’ कहने वाले Mohammad Deepak का मामला और Uttarakhand में बढ़ता सांप्रदायिक तनाव !!

“मैं पहले इंसान हूं” कहने वाले Mohammad Deepak का मामला Uttarakhand के Kotdwar में नाम और पहचान पर बवाल Communal Harmony India पर फिर खड़े हुए सवाल पूरा मामला, सभी पक्ष और पुलिस की कार्रवाई पढ़िए....

EDITED BY: Vishal Yadav

UPDATED: Monday, February 2, 2026

Communal Harmony India: ‘मैं पहले इंसान हूं’ कहने वाले Mohammad Deepak का मामला और Uttarakhand में बढ़ता सांप्रदायिक तनाव !!

हम भारत की कल्पना कैसे करते हैं? एक ऐसा भारत जहां सांप्रदायिक सौहार्द, आपसी सम्मान और इंसानियत सबसे ऊपर हो। एक ऐसा भारत जो धर्म, जाति और पहचान से ऊपर उठकर बराबरी की बात करे। इसी भारत की तस्वीर को अपने शब्दों और सोच में लेकर चलने वाले एक शख्स हैं दीपक कुमार कश्यप, जो खुद को Mohammad Deepak कहकर पहचानते हैं। हाल के दिनों में उत्तराखंड के कोटद्वार से जुड़ा उनका मामला न सिर्फ सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना, बल्कि इसने एक बार फिर देश में Communal Harmony India और धार्मिक सह-अस्तित्व पर बहस छेड़ दी है।

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Communal Harmony India: ‘मैं पहले इंसान हूं’ कहने वाले Mohammad Deepak का मामला और Uttarakhand में बढ़ता सांप्रदायिक तनाव !!

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में Mohammad Deepak हाथ जोड़कर देश के लोगों से अपील करते नजर आते हैं। वह कहते हैं कि न वह हिंदू हैं, न मुसलमान, न सिख और न ईसाई, बल्कि सबसे पहले एक इंसान हैं। उनका संदेश साफ है कि देश को नफरत नहीं, बल्कि प्यार और मोहब्बत की जरूरत है। उनका यह बयान उन तमाम वीडियो के बीच आया है, जिनमें धर्म के नाम पर लोगों को निशाना बनाया जा रहा है।

Mohammad Deepak की यह अपील कई लोगों के दिल को छू गई, लेकिन कुछ संगठनों को शायद यह बात रास नहीं आई। खासतौर पर बजरंग दल से जुड़े कुछ कार्यकर्ताओं ने उनके नाम और पहचान को लेकर आपत्ति जताई, जिसके बाद यह मामला सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक फैल गया।

घटना की शुरुआत 26 जनवरी से मानी जा रही है, जब उत्तराखंड के कोटद्वार इलाके में कथित तौर पर तनाव की स्थिति बनी। इसके बाद 31 जनवरी को हालात और बिगड़ गए। वायरल वीडियो के मुताबिक बजरंग दल से जुड़े कुछ कार्यकर्ता कोटद्वार पहुंचे और वहां एक दुकान पर आपत्ति जताई। दुकान का नाम था “बाबा स्कूल ड्रेस एंड मैचिंग सेंटर”। हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं को बोर्ड पर लिखे “बाबा” शब्द से आपत्ति थी। उनका सवाल था कि दुकान के नाम में “बाबा” क्यों लिखा गया है।

इसी दौरान दीपक कुमार कश्यप उर्फ Mohammad Deepak वहां पहुंचे और उन्होंने सवाल किया कि अगर कोई व्यक्ति 30 साल से इसी नाम से अपनी दुकान चला रहा है, तो इसमें दिक्कत क्या है। बहस बढ़ती गई और इसी दौरान रिकॉर्ड किया गया वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो में देखा जा सकता है कि दुकान का नाम बदलने को लेकर तीखी बहस हो रही है और माहौल तनावपूर्ण होता जा रहा है।

Communal Harmony India: ‘मैं पहले इंसान हूं’ कहने वाले Mohammad Deepak का मामला और Uttarakhand में बढ़ता सांप्रदायिक तनाव !!

Mohammad Deepak उत्तराखंड के कोटद्वार के रहने वाले हैं और वह एक जिम चलाते हैं। बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, दीपक कुमार का कहना है कि 31 जनवरी को बजरंग दल के कार्यकर्ता कोटद्वार पहुंचे और न सिर्फ हंगामा किया, बल्कि उनके और उनके परिवार के साथ गाली-गलौज भी की गई। हैरानी की बात यह बताई गई कि यह सब प्रशासन की मौजूदगी में हुआ। अफसरों के सामने ही कुछ लोग गुस्से में दीपक की ओर दौड़ते नजर आए।

इस पूरे घटनाक्रम ने Uttarakhand communal tension को लेकर सवाल खड़े कर दिए। वीडियो में दिखाई देता है कि पुलिस मौके पर मौजूद थी, लेकिन हालात काफी देर तक काबू में नहीं आ पाए। इंडिया टुडे से जुड़े पत्रकार विकास वर्मा की रिपोर्ट के मुताबिक, कोटद्वार शहर के मालवीय उद्यान में बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने जमकर हंगामा किया। हालात इतने बिगड़े कि शहर में जाम लग गया।

रिपोर्ट के अनुसार, पहले शहर में जुलूस निकाला गया और उसके बाद Mohammad Deepak के जिम के बाहर प्रदर्शन शुरू हुआ। हालात को देखते हुए पुलिस ने दीपक कुमार और उनके साथी विजय रावत को सुरक्षा कारणों से कोतवाली में बैठा दिया। पुलिस काफी देर तक प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश करती रही, लेकिन बात नहीं बनी। आखिरकार मुख्यमंत्री के कार्यक्रम की सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों को मौके पर बुलाया गया। तब जाकर देहरादून से आए बजरंग दल के कार्यकर्ताओं को कोटद्वार शहर से बाहर खदेड़ा गया।

इस दौरान दीपक कुमार और विजय रावत के समर्थन में कोटद्वार के दर्जनों लोग कोतवाली पहुंच गए। हालांकि जब पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से इस पूरे मामले पर सवाल किए गए, तो उन्होंने इसे आपसी मामला बताते हुए ज्यादा कुछ कहने से इनकार कर दिया और कहा कि इसे जल्द सुलझा लिया जाएगा।

Communal Harmony India: ‘मैं पहले इंसान हूं’ कहने वाले Mohammad Deepak का मामला और Uttarakhand में बढ़ता सांप्रदायिक तनाव !!

वहीं बजरंग दल ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया है। देहरादून से कोटद्वार पहुंचे बजरंग दल के कार्यकर्ता नरेश उनियाल ने सफाई देते हुए कहा कि बजरंग दल किसी राजनीतिक पार्टी का संगठन नहीं है, बल्कि हिंदुओं की रक्षा के लिए काम करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि वामपंथी और कांग्रेसी विचारधारा के लोग बजरंग दल के खिलाफ नफरत फैलाने का नैरेटिव चला रहे हैं।

नरेश उनियाल का यह भी कहना था कि Mohammad Deepak की सोशल मीडिया गतिविधियों से उनकी विचारधारा सामने आती है और मीडिया एकतरफा तरीके से इस पूरे मामले को पेश कर रही है। उन्होंने बांग्लादेश और अन्य घटनाओं का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि कुछ मामलों पर आवाज क्यों नहीं उठाई जाती।

इस पूरे विवाद के बीच पुलिस प्रशासन ने कहा है कि मामले की जांच की जा रही है। उत्तराखंड पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी चंद्रमोहन सिंह ने कहा कि वीडियो फुटेज के आधार पर लोगों की पहचान की जा रही है और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि 26 जनवरी की घटना और 31 जनवरी के हंगामे, दोनों मामलों की जांच एक साथ की जा रही है।

यह पूरा मामला केवल एक व्यक्ति, एक दुकान या एक नाम तक सीमित नहीं है। यह उस बड़े सवाल से जुड़ा है कि Communal Harmony India की दिशा में हम कहां खड़े हैं। Mohammad Deepak का संदेश साफ है कि इंसानियत किसी धर्म की मोहताज नहीं होती। लेकिन कोटद्वार की घटना यह दिखाती है कि पहचान और नाम के आधार पर विवाद किस तरह सामाजिक तनाव को जन्म दे सकते हैं।

भारत जैसे विविधताओं से भरे देश में धार्मिक सह-अस्तित्व हमेशा से हमारी ताकत रहा है। लेकिन जब छोटी-छोटी बातों पर विवाद बढ़ने लगते हैं, तो सवाल उठता है कि क्या हम उस भारत की ओर बढ़ रहे हैं, जिसकी कल्पना संविधान और स्वतंत्रता आंदोलन के नेताओं ने की थी।

यह मामला प्रशासन, समाज और नागरिकों तीनों के लिए एक परीक्षा है। प्रशासन के लिए कानून-व्यवस्था बनाए रखने की, समाज के लिए संयम और समझदारी दिखाने की और नागरिकों के लिए यह तय करने की कि वे नफरत के साथ खड़े होना चाहते हैं या इंसानियत के साथ। आप इस पूरे मामले को कैसे देखते हैं? क्या Mohammad Deepak का संदेश आज के भारत में ज्यादा प्रासंगिक हो गया है? अपनी राय जरूर साझा करें।

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