CJI BR Gavai Statement Controversy: सुप्रीम कोर्ट के CJI BR Gavai हाल ही में अपने एक बयान को लेकर विवादों में आ गए। खजुराहो मंदिर की भगवान विष्णु की मूर्ति के पुनर्निर्माण पर सुनवाई के दौरान दिए गए उनके ऑब्ज़र्वेशन ने सोशल मीडिया पर बड़ा बवाल खड़ा कर दिया। आरोप लगे कि उनकी टिप्पणी हिंदू धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली है। बढ़ते विवाद के बाद सीजेआई को खुद सफाई देनी पड़ी और उन्होंने कहा—“मैं सभी धर्मों का सम्मान करता हूं और सबका आदर करता हूं।”
CJI BR Gavai Statement Controversy: मामला कैसे शुरू हुआ?
मध्य प्रदेश के छतरपुर स्थित खजुराहो का जावरी मंदिर, जो भगवान विष्णु को समर्पित है, यूनेस्को हेरिटेज साइट में शामिल है। इस मंदिर में 7 फीट ऊँची विष्णु की टूटी हुई मूर्ति है। मूर्ति के पुनर्निर्माण के लिए 13 जून 2023 को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। याचिकाकर्ता राकेश दलाल ने मांग की थी कि मूर्ति को पुनः स्थापित किया जाए।
16 सितंबर को सुनवाई के दौरान CJI BR Gavai और जस्टिस विनोद चंद्रन की बेंच ने इस याचिका को खारिज कर दिया। सुनवाई के दौरान सीजेआई ने इसे “Publicity Interest Litigation” करार देते हुए कहा कि अगर भक्त हैं तो प्रार्थना करें, भगवान खुद उपाय करेंगे।
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सोशल मीडिया पर विवाद
इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर आलोचनाओं की बाढ़ आ गई। कई यूजर्स और संगठनों ने इसे हिंदू धर्म का अपमान बताया। शंकराचार्य मुक्तेश्वरानंद ने लेटर जारी कर सीजेआई से बयान वापस लेने की मांग की। विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने भी इसे अनुचित बताया और सवाल किया कि क्या इस तरह की टिप्पणी किसी अन्य धर्म को लेकर की जा सकती थी?
सीजेआई की सफाई
18 सितंबर को अवैध माइनिंग से जुड़े एक अन्य मामले की सुनवाई के दौरान सीजेआई गवई ने कहा कि सोशल मीडिया पर बहुत कुछ गलत तरीके से फैलाया जा रहा है। उन्होंने साफ किया—“मैं सभी धर्मों में विश्वास रखता हूं और सबका आदर करता हूं।” सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी कोर्ट में सीजेआई की बात का समर्थन किया।
ASI का पक्ष
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने स्पष्ट किया कि खजुराहो मंदिर उनकी देखरेख में है और टूटी मूर्तियों को नई मूर्तियों से बदलना उनके संरक्षण नियमों के खिलाफ है। उनका कहना है कि उनका दायित्व मौजूदा धरोहर की सुरक्षा है, न कि नए निर्माण का।
याचिकाकर्ता की अगली रणनीति
याचिकाकर्ता राकेश दलाल ने सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद कहा कि वे प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और लोकसभा स्पीकर तक अपनी बात पहुंचाएंगे। साथ ही विपक्षी नेताओं से भी सहयोग मांगेंगे।
ऐतिहासिक महत्व
खजुराहो के मंदिर चंदेल राजवंश के शासनकाल (10वीं–11वीं शताब्दी) में बने थे। पहले यहाँ 85 मंदिर थे, जिनमें अब केवल 20 ही शेष हैं। यही कारण है कि इन मंदिरों को विश्व धरोहर के रूप में संरक्षित किया गया है।
यह विवाद भारतीय न्यायपालिका के शीर्ष पद की जिम्मेदारियों और सामाजिक संवेदनशीलता के बीच के संतुलन को दिखाता है। सीजेआई गवई ने भले ही सफाई दे दी हो, लेकिन यह मामला धर्म, संस्कृति और न्यायपालिका के बीच जटिल संबंधों की ओर ध्यान खींचता है।






