गाजियाबाद सीमा पार कर मेरठ पहुंचे, टोल प्लाजा पर रोके गए
काफी जद्दोजहद के बाद नगीना से सांसद Chandrashekhar Azad गाजियाबाद के यूपी गेट से आगे बढ़ते हुए मेरठ के काशी टोल प्लाजा तक पहुंचे। लेकिन वहां पहले से तैनात पुलिस बल ने उन्हें रोक लिया और आगे गांव जाने की अनुमति नहीं दी। पुलिस के रोकते ही उनके समर्थकों की भीड़ जमा हो गई और मौके पर माहौल तनावपूर्ण हो गया।
Chandrashekhar Azad Meerut Visit इसी बिंदु से सुर्खियों में आ गया, जहां एक सांसद को पीड़ित परिवार से मिलने से रोका गया।
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चंद्रशेखर आज़ाद की मांग: पहले परिवार से बात हो
पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद चंद्रशेखर आज़ाद ने मीडिया से बातचीत की। उन्होंने साफ कहा कि उनकी सबसे पहली मांग पीड़ित दलित परिवार से बातचीत करने की है। उनका कहना था कि किसी के जख्म पर मरहम लगाना सबके बस की बात नहीं होती, लेकिन पीड़ित की बात सुन लेने से दर्द कुछ हल्का जरूर होता है।
उन्होंने कहा कि एक जनप्रतिनिधि होने के नाते वह परिवार का पक्ष जानना चाहते हैं और उसे संसद हो या सड़क, हर मंच पर रखने को तैयार हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि उनकी मांग किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर है।
मुख्यमंत्री के बयान पर उठाए सवाल
मीडिया बातचीत के दौरान चंद्रशेखर आज़ाद ने उत्तर प्रदेश सरकार पर भी सवाल उठाए। उन्होंने मुख्यमंत्री के उस बयान का जिक्र किया जिसमें कहा गया था कि प्रदेश में बेटियों के सम्मान के लिए सरकार सख्त है।
आज़ाद ने कहा कि इस मामले में 52 घंटे बीत जाने के बाद भी कार्रवाई न होना कई सवाल खड़े करता है। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि क्या यहां यमराज सो रहे हैं या छुट्टी पर चले गए हैं। उनके मुताबिक अगर सरकार सिर्फ आर्थिक मदद देकर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान रही है तो यह पर्याप्त नहीं है, असली जरूरत न्याय की है।
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पूरा मामला क्या है, कैसे शुरू हुआ विवाद
पूरा मामला मेरठ के Sardhana इलाके के कपसाड़ गांव से जुड़ा है। आरोप है कि 8 जनवरी की सुबह एक दलित महिला अपनी बेटी के साथ खेत जा रही थी। इसी दौरान गांव के ही कुछ दबंगों ने महिला के साथ मारपीट की और लड़की को जबरन किडनैप कर लिया।
हमले में गंभीर रूप से घायल महिला को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। वहीं किडनैप की गई लड़की का अब तक कोई सुराग नहीं लग पाया है।
गांव छावनी में तब्दील, मुख्य आरोपी की तलाश
घटना के बाद कपसाड़ गांव को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया। गांव को जोड़ने वाले चारों प्रमुख रास्तों पर बैरियर लगाए गए और भारी पुलिस बल तैनात किया गया। पीड़ित परिवार और आरोपियों के घरों के बाहर भी सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
इस मामले में गांव के ही रहने वाले पारस राजपूत को मुख्य आरोपी बताया जा रहा है। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की कई टीमें बनाई गई हैं। कड़ी सुरक्षा के बीच महिला का अंतिम संस्कार कराया गया।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज
इस घटना पर प्रदेश की राजनीति भी गर्म हो गई है। बसपा सुप्रीमो Mayawati और समाजवादी पार्टी प्रमुख Akhilesh Yadav ने बयान जारी कर सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग की है।
सरधना से सपा विधायक Atul Pradhan शुरू से ही मामले में सक्रिय हैं। वहीं बीजेपी के पूर्व विधायक Sangeet Som भी पीड़ित दलित परिवार से मिलने पहुंचे थे। आजाद समाज पार्टी की ओर से चंद्रशेखर आज़ाद ने भी गांव जाने का ऐलान किया था, लेकिन उन्हें रास्ते में ही रोक दिया गया।
पुलिस और प्रशासन आमने-सामने सवालों के घेरे में
Chandrashekhar Azad Meerut Visit अब सिर्फ एक दौरे तक सीमित नहीं रह गया है। यह सवाल खड़ा कर रहा है कि क्या जनप्रतिनिधियों को पीड़ितों से मिलने से रोका जाना सही है और क्या प्रशासन की भूमिका पूरी तरह निष्पक्ष है।
फिलहाल मामला बेहद संवेदनशील बना हुआ है और गांव में भारी पुलिस तैनाती के बीच हालात पर नजर रखी जा रही है।






