भारत में होने जा रही अगली जनगणना को लेकर इस समय देशभर में चर्चा तेज है। वजह साफ है, क्योंकि इस बार सरकार लोगों से सिर्फ यह नहीं पूछेगी कि घर में कितने लोग रहते हैं, बल्कि यह भी जानना चाहेगी कि आपका घर कैसा है, उसमें कितने कमरे हैं, आप किस ईंधन से खाना बनाते हैं, आपके पास मोबाइल, इंटरनेट, कार है या नहीं और आप किस सामाजिक वर्ग से ताल्लुक रखते हैं। Census 2027 India questions के तहत केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि इस बार जनगणना पहले से कहीं ज्यादा विस्तृत, डिजिटल और डेटा आधारित होने वाली है।

22 जनवरी को केंद्र सरकार ने इससे जुड़ा नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट हो गया है कि इस बार सरकार आपसे कुल 33 सीधे और स्पष्ट सवाल पूछेगी। ये सवाल घर, परिवार, सुविधाओं, संसाधनों और जीवनशैली से जुड़े होंगे। खास बात यह है कि यह भारत की पहली डिजिटल जनगणना होगी और आज़ाद भारत के इतिहास में पहली बार जाति आधारित आंकड़े भी आधिकारिक जनगणना का हिस्सा बनाए जाएंगे। यही कारण है कि Census 2027 India questions को लेकर राजनीतिक, सामाजिक और प्रशासनिक स्तर पर बहस भी शुरू हो चुकी है।
दो चरणों में होगी जनगणना, डिजिटल होगा पूरा प्रोसेस
Census 2027 India questions को समझने से पहले जनगणना की पूरी प्रक्रिया जानना जरूरी है। इस बार जनगणना दो चरणों में कराई जाएगी। पहला चरण इसी साल अप्रैल से शुरू होकर सितंबर तक चलेगा। इस चरण को हाउस लिस्टिंग फेज कहा जाएगा। इसमें सरकारी कर्मचारी घर-घर जाकर मकानों की जानकारी जुटाएंगे। घर की बनावट, सुविधाएं, संसाधन और जीवनशैली से जुड़े सवाल इसी चरण में पूछे जाएंगे।
दूसरा चरण फरवरी 2027 में होगा, जिसमें देश की आबादी की गिनती की जाएगी। इसी चरण में पहली बार जाति आधारित आंकड़े भी दर्ज किए जाएंगे। आज़ाद भारत में यह पहला मौका होगा जब जातिगत डेटा को आधिकारिक जनगणना का हिस्सा बनाया जाएगा। इससे पहले व्यापक जातिगत जनगणना 1881 से 1931 के बीच ब्रिटिश काल में हुई थी।
सरकार पहले ही यह साफ कर चुकी है कि यह देश की पहली डिजिटल जनगणना होगी। लगभग 30 लाख कर्मचारी मोबाइल और टैबलेट ऐप्स के जरिए डेटा कलेक्ट करेंगे। इस पूरी प्रक्रिया पर करीब ₹11,718 करोड़ खर्च होने का अनुमान है। भारत सरकार का कहना है कि डिजिटल प्रक्रिया से डेटा ज्यादा सटीक, तेज और सुरक्षित होगा।

Census 2027 India questions: सरकार आपसे क्या-क्या पूछेगी
अब सबसे अहम सवाल यह है कि Census 2027 India questions के तहत वे 33 सवाल कौन से होंगे, जिनका जवाब हर नागरिक को देना होगा। इन सवालों की सूची गृह मंत्रालय के तहत Registrar General of India के कार्यालय ने जारी की है। जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण के आदेश के मुताबिक, ये सवाल जनगणना अधिनियम 1948 के तहत पूछे जाएंगे।
इन सवालों की शुरुआत घर की पहचान से होगी, जैसे मकान नंबर, जनगणना घर का नंबर और घर की लोकेशन। इसके बाद घर की बनावट से जुड़े सवाल पूछे जाएंगे, जिनमें फर्श, दीवार और छत में इस्तेमाल की गई सामग्री शामिल है। घर की हालत कैसी है, अच्छी है या जर्जर, और घर का उपयोग किस उद्देश्य से हो रहा है, यह भी पूछा जाएगा।
इसके बाद परिवार से जुड़े सवाल होंगे, जैसे घर में सामान्य रूप से रहने वाले लोगों की संख्या, परिवार के मुखिया का नाम और लिंग, परिवार किस सामाजिक वर्ग से संबंधित है, यानी अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य वर्ग। घर का मालिकाना हक किसके पास है, खुद का है या किराए का, और घर में रहने के लिए कितने कमरे हैं, यह जानकारी भी ली जाएगी।
Census 2027 India questions में बुनियादी सुविधाओं पर खास फोकस किया गया है। पीने के पानी का स्रोत क्या है, घर में बिजली का कनेक्शन है या नहीं, शौचालय की सुविधा है या नहीं और शौचालय किस प्रकार का है, यह सब पूछा जाएगा। गंदे पानी की निकासी, नहाने की सुविधा और रसोई से जुड़े सवाल भी शामिल हैं।
रसोई से जुड़े सवालों में पूछा जाएगा कि घर में एलपीजी या पीएनजी कनेक्शन है या नहीं और खाना पकाने के लिए किस ईंधन का इस्तेमाल किया जाता है। क्या अब भी लकड़ी या उपले जलाए जाते हैं, यह भी दर्ज किया जाएगा। इसके अलावा घर में रेडियो, टीवी, इंटरनेट, लैपटॉप, कंप्यूटर, मोबाइल या स्मार्टफोन की उपलब्धता के बारे में भी जानकारी ली जाएगी।
यातायात और संसाधनों से जुड़े सवालों में साइकिल, स्कूटर, मोटरसाइकिल, मोपेड, कार, जीप या वैन की उपलब्धता पूछी जाएगी। यहां तक कि घर में मुख्य रूप से कौन सा अनाज खाया जाता है, यह भी Census 2027 India questions का हिस्सा है। आखिरी और 33वां सवाल मोबाइल नंबर से जुड़ा होगा, जिसे केवल जनगणना से संबंधित संपर्क के लिए लिया जाएगा।
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डेटा की गोपनीयता, खर्च और जनगणना का महत्व
Census 2027 India questions को लेकर लोगों की सबसे बड़ी चिंता डेटा की गोपनीयता को लेकर है। सरकार ने साफ कहा है कि यह सारी जानकारी केवल जनगणना के उद्देश्य से ली जाएगी। मोबाइल नंबर और अन्य व्यक्तिगत जानकारी किसी भी एजेंसी के साथ साझा नहीं की जाएगी। जनगणना अधिकारी जो भी डेटा दर्ज करेंगे, वह पूरी तरह सुरक्षित और एन्क्रिप्टेड होगा।
यह जनगणना इसलिए भी खास है क्योंकि मूल रूप से इसे 2021 में होना था, लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण इसे टालना पड़ा। आज़ाद भारत के इतिहास में यह पहली बार हुआ जब समय पर जनगणना नहीं हो सकी। इससे पहले दूसरे विश्व युद्ध या चीन-पाकिस्तान युद्ध के दौरान भी जनगणना प्रक्रिया नहीं रुकी थी।
आखिरी बार 2011 में हुई जनगणना के मुताबिक भारत की आबादी करीब 121 करोड़ थी, जिसमें लगभग 62 करोड़ पुरुष और 58 करोड़ महिलाएं थीं। अब Census 2027 India questions और उससे मिलने वाले डेटा के आधार पर सरकार को यह समझने में मदद मिलेगी कि देश में आवास, सुविधाएं, डिजिटल पहुंच, सामाजिक संरचना और जीवनशैली में कितना बदलाव आया है। यही आंकड़े भविष्य की योजनाओं, आरक्षण नीति, कल्याणकारी योजनाओं और संसाधनों के बंटवारे की दिशा तय करेंगे।






