बजट 2026 की स्पीच खत्म होते ही सबसे तेज़ और सबसे बड़ा रिएक्शन अगर कहीं देखने को मिला, तो वह शेयर मार्केट में देखने को मिला। जैसे ही बजट पेश हुआ, बाजार में हलचल तेज़ हो गई और कुछ ही देर में Sensex और Nifty में भारी गिरावट दर्ज की गई। Budget 2026 share market reaction ने निवेशकों को चौंका दिया और सबसे ज़्यादा चर्चा में आया एक शब्द – STT increase Budget 2026।
जब यह बातचीत हो रही थी, उस वक्त दोपहर करीब 1:30 बजे का समय था। दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर ऑफ इकोनॉमिक्स सिद्धार्थ ने मार्केट की स्थिति को साफ शब्दों में बताया। उनके मुताबिक उस समय Sensex करीब 650 से 700 अंकों की गिरावट के साथ ट्रेड कर रहा था, वहीं Nifty लगभग 300 अंक नीचे आ चुका था। सवाल साफ था कि आखिर बजट में ऐसा क्या कहा गया, जिससे बाजार का सेंटीमेंट इतना नेगेटिव हो गया।
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इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह बताई गई STT यानी Securities Transaction Tax में बढ़ोतरी। आम निवेशकों के लिए STT एक तकनीकी शब्द हो सकता है, लेकिन इसका असर सीधा उनकी जेब और ट्रेडिंग कॉस्ट पर पड़ता है। STT को आसान भाषा में समझें तो यह एक तरह का “एंट्री चार्ज” है। जैसे किसी पार्टी या पब में जाने के लिए कवर चार्ज देना पड़ता है या हाईवे पर चलने के लिए टोल टैक्स देना पड़ता है, वैसे ही शेयर मार्केट में ट्रांजैक्शन करने के लिए STT देना होता है। फर्क नहीं पड़ता कि आप प्रॉफिट में हैं या लॉस में, यह टैक्स आपको देना ही होता है।
Budget 2026 में STT को लेकर क्या बदलाव हुए
Budget 2026 में STT on futures and options को लेकर दो बड़े बदलाव किए गए हैं। यही बदलाव बाजार में घबराहट और बिकवाली की सबसे बड़ी वजह बने।
पहला बदलाव Futures ट्रेडिंग को लेकर है। पहले Futures पर STT की दर 0.02% थी, जिसे बढ़ाकर अब 0.05% कर दिया गया है। इसका मतलब यह है कि Futures में ट्रेड करने वाले निवेशकों को अब पहले के मुकाबले ढाई गुना ज्यादा STT देना होगा।
दूसरा बड़ा बदलाव Options ट्रेडिंग में किया गया है। पहले Options पर STT 0.01% था, जिसे बढ़ाकर अब 0.015% कर दिया गया है। यानी Options ट्रेडिंग भी अब पहले से महंगी हो गई है।
इसका सीधा असर यह है कि अगर आप Futures और Options में ट्रेड कर रहे हैं, तो आपको हर ट्रांजैक्शन पर ज्यादा पैसे चुकाने पड़ेंगे। इससे फर्क नहीं पड़ता कि आपको मुनाफा हो रहा है या नुकसान, STT हर हाल में देना ही होगा। यही वजह है कि Budget 2026 share market reaction इतना तेज़ देखने को मिला।
Futures और Options आखिर हैं क्या और ये शेयर से कैसे अलग हैं
बहुत से लोग शेयर खरीदने और Futures–Options ट्रेडिंग को एक जैसा समझ लेते हैं, जबकि दोनों में ज़मीन-आसमान का फर्क है। Futures और Options को अक्सर एक तरह की सट्टा बाज़ारी भी कहा जाता है। इसमें आप भविष्य की कीमत पर दांव लगाते हैं। जैसे आज आप यह तय कर रहे हैं कि छह महीने बाद सोने या किसी शेयर की कीमत क्या होगी।
कोविड के बाद के दौर में यह ट्रेंड तेजी से बढ़ा है। बड़ी संख्या में लोगों ने बैंकों से पैसा निकालकर शेयर मार्केट में, खासतौर पर Futures और Options में निवेश करना शुरू किया। इसकी वजह साफ है – यहां जल्दी रिटर्न का लालच होता है और आप अपने पास मौजूद पैसे से कई गुना ज्यादा ट्रेड कर सकते हैं, जिसे मार्जिन ट्रेडिंग कहा जाता है। उदाहरण के लिए, अगर आपके पास ₹10 हैं, तो आप ₹40 तक का ट्रेड कर सकते हैं।

इसी वजह से Futures और Options की तुलना अक्सर Dream11, MyCircle11, ऑनलाइन रमी या बेटिंग से की जाती है। फर्क सिर्फ इतना है कि यह सट्टा स्टॉक मार्केट के प्लेटफॉर्म पर होता है।
SEBI की रिपोर्ट और चौंकाने वाले आंकड़े
SEBI की एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले डेढ़ से दो सालों में Futures और Options में ट्रेड करने वाले करीब 95% निवेशकों को नुकसान हुआ है। इन निवेशकों ने कुल मिलाकर करीब ₹1 लाख करोड़ का नुकसान उठाया है। यह आंकड़ा बताता है कि जल्दी पैसे कमाने की चाह में लोग कितनी बड़ी कीमत चुका रहे हैं।
यही वजह है कि सरकार का फोकस अब Futures और Options जैसी सट्टा प्रवृत्ति को कम करने पर है। Budget 2026 में STT increase का एक बड़ा मकसद यही माना जा रहा है कि लोग इस तरह की हाई-रिस्क ट्रेडिंग से दूर रहें और लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट की तरफ लौटें।
Zerodha के फाउंडर निखिल कामत का नजरिया
दिलचस्प बात यह है कि इस पूरे मुद्दे पर ब्रोकरेज इंडस्ट्री का भी अपना नजरिया है। Zerodha के फाउंडर निखिल कामत ने भी इस पर अपनी राय रखी थी। उन्होंने कहा था कि एक ब्रोकरेज कंपनी होने के नाते वे चाहते हैं कि STT कम हो, क्योंकि ज्यादा ट्रेडिंग से उनकी कंपनी को फायदा होता है। लेकिन उन्होंने यह भी माना कि सरकार ने यह फैसला निवेशकों के हित में लिया है, ताकि लोग अपना पैसा गंवाने से बच सकें।
ठीक इसी तरह जैसे ऑनलाइन बेटिंग और गेमिंग को बैन किया गया, क्योंकि लोग बिना समझे वहां पैसा गंवा रहे थे, वैसे ही Futures और Options में भी सरकार अब सख्ती दिखा रही है।
STT बढ़ाने के पीछे सरकार की सोच
STT increase Budget 2026 को सिर्फ टैक्स बढ़ाने के नजरिए से नहीं देखा जा सकता। इसके पीछे एक बड़ी आर्थिक सोच है। सरकार चाहती है कि देश में सेविंग्स सुरक्षित रहें। आज की तारीख में लोग बैंक डिपॉजिट्स की जगह शेयर मार्केट और सट्टा टाइप निवेशों की तरफ ज्यादा बढ़ रहे हैं।
बजट में यह भी संकेत दिया गया है कि सरकार एक कमेटी बना सकती है, जो बैंक डिपॉजिट्स पर मिलने वाले ब्याज और उस पर लगने वाले टैक्स की समीक्षा करेगी। अभी स्थिति यह है कि अगर आप इक्विटी में लॉन्ग टर्म निवेश करते हैं, तो आपको 12.5% या 20% टैक्स देना पड़ता है, जबकि बैंक डिपॉजिट से मिलने वाले रिटर्न पर आपकी इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है।
इस असमानता की वजह से लोग बैंक में पैसा रखने की बजाय शेयर मार्केट में जा रहे हैं। नतीजा यह है कि बैंकों के पास डिपॉजिट कम हो रहे हैं और इससे लोन देने की क्षमता भी प्रभावित हो रही है। इसे ही Deposit Creation और Credit-Deposit Ratio की समस्या कहा जाता है, जो आज भारतीय बैंकिंग सिस्टम के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुकी है।

रिटेल निवेशकों के लिए इसका क्या मतलब है
अगर आप एक रिटेल इन्वेस्टर हैं और आपने अपना डीमैट अकाउंट खोला है, तो यह समझना जरूरी है कि STT सिर्फ Futures और Options तक सीमित नहीं है। शेयर खरीदने और बेचने पर भी STT लगता है, लेकिन Budget 2026 में जो बड़े बदलाव हुए हैं, वे खासतौर पर Futures और Options को लेकर हैं।
एक साधारण निवेशक के लिए संदेश साफ है। अगर आप लंबे समय के लिए निवेश कर रहे हैं, अच्छी ग्रोथ वाली कंपनियों में और खासतौर पर Large Cap कंपनियों में निवेश करते हैं, तो शेयर मार्केट में अब भी पैसा बनाया जा सकता है। लेकिन अगर आप जल्दी मुनाफे के चक्कर में Futures और Options में जा रहे हैं, तो बढ़ा हुआ STT और पहले से मौजूद रिस्क आपके नुकसान को और बढ़ा सकता है।
निष्कर्ष: Budget 2026 का असली संकेत
Budget 2026 और STT increase Budget 2026 का असली संकेत यह है कि सरकार शेयर मार्केट में सट्टा प्रवृत्ति को हतोत्साहित करना चाहती है। Sensex और Nifty की गिरावट एक शॉर्ट टर्म रिएक्शन हो सकता है, लेकिन लंबे समय में यह फैसला निवेशकों को ज्यादा सुरक्षित और स्थिर निवेश की तरफ ले जाने की कोशिश है।
अगर आप निवेशक हैं, तो यह वक्त है अपनी रणनीति पर दोबारा सोचने का। जल्दी पैसे की बजाय लॉन्ग टर्म ग्रोथ, समझदारी और रिस्क मैनेजमेंट को प्राथमिकता देने का।






