Blue Smart Cab : इलेक्ट्रिक कैब सर्विस देने वाली ब्लूस्मार्ट (BluSmart) कंपनी इन दिनों सुर्खियों में है — और वजह है इसकी अपनी सोशल मीडिया टीम। दरअसल, Blue Smart की सोशल मीडिया टीम ने कंपनी के आधिकारिक एक्स (Twitter) हैंडल से ही कंपनी के खिलाफ पोस्ट कर दिया। पोस्ट में लिखा गया कि कंपनी फरवरी 2025 से बंद है, फाउंडर ने धोखाधड़ी की है और कर्मचारियों को चार महीने से तनख्वाह नहीं मिली है।

कंपनी के हैंडल से हुआ खुलासा
10 अक्टूबर की सुबह 9:56 पर कंपनी के आधिकारिक अकाउंट से पोस्ट किया गया —
“Blue Smart कंपनी फरवरी 2025 में बंद हो चुकी है। कंपनी के फाउंडर ने फ्रॉड किया था। अपने वॉलेट के पैसे वापस मिलने की उम्मीद मत कीजिए। कर्मचारियों को भी 4 महीने की सैलरी नहीं मिली है।”
यह पोस्ट सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गई।
कुछ ही घंटों में इसे 4 लाख से ज्यादा व्यूज़, हजारों लाइक और सैकड़ों रीशेयर मिले।
यूजर्स ने मज़ेदार और तीखी प्रतिक्रियाएं दीं।
नितिन शाह नाम के यूजर ने लिखा,
“कंपनी के सोशल मीडिया मैनेजर को हमेशा टाइम पर सैलरी दो, वरना यही हाल होगा।”
एक अन्य यूजर स्वाति शाह ने लिखा,
“सोशल मीडिया मैनेजर की कम चर्चित भूमिका की असली शक्ति।”
वहीं किसी ने लिखा,
“लोग कितने परेशान होंगे कि उन्होंने अपने करियर को दांव पर लगाकर ऐसा कदम उठाया।”
Blue Smart का सफर — ओला और उबर को टक्कर देने से लेकर बंद होने तक
Blue Smart की शुरुआत 2019 में हुई थी। यह भारत की पहली इलेक्ट्रिक कैब सर्विस में से एक थी, जिसने एक वक्त पर Ola और Uber को कड़ी टक्कर दी।
लेकिन 2024 आते-आते कंपनी भारी घाटे में जाने लगी।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी को अपने संचालन के लिए $50 मिलियन (करीब ₹415 करोड़) की ज़रूरत थी, जो वह जुटा नहीं पाई।
इसके बाद फरवरी 2025 में कंपनी ने अपनी सभी बुकिंग “अस्थाई रूप से बंद” कर दीं और यूज़र्स को वादा किया कि
“अगर 90 दिनों में सर्विस शुरू नहीं होती, तो वॉलेट का बैलेंस वापस कर दिया जाएगा।”
लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
सेलिब्रिटी निवेशक भी रहे शामिल
Blue Smart में दीपिका पादुकोण ने 2019 में लगभग ₹25.6 करोड़, जबकि महेंद्र सिंह धोनी ने करीब ₹5 करोड़ का निवेश किया था।
धोनी 2022 में कंपनी के ब्रांड एंबेसडर भी बने थे।
हालांकि, कंपनी पर वित्तीय गड़बड़ियों के आरोप लगने के बाद SEBI ने कंपनी के प्रमोटर अनमोल सिंह जग्गी और पुनीत सिंह जग्गी को मार्केट से बैन कर दिया।
कर्मचारियों का गुस्सा सोशल मीडिया पर फूटा
चार महीने से सैलरी न मिलने के कारण सोशल मीडिया टीम का गुस्सा आखिरकार कंपनी के ही प्लेटफॉर्म पर फूट पड़ा।
अब यह स्पष्ट नहीं है कि पोस्ट किसी कर्मचारी ने की या इंटर्न ने, लेकिन यह साफ है कि कर्मचारियों की नाराज़गी चरम पर पहुंच चुकी थी।
कंपनी जब कर्मचारियों को भुगतान नहीं कर पा रही थी, तब यही गुस्सा सोशल मीडिया हैंडल पर फट पड़ा — और Blue Smart की पोल दुनिया के सामने खुल गई।
Blue Smart की कहानी यह दिखाती है कि जब कंपनियां अपने कर्मचारियों के हक की अनदेखी करती हैं, तो ‘डैमेज कंट्रोल’ का बटन भी उन्हीं कर्मचारियों के हाथ में होता है।
कर्मचारियों का यह कदम इंटरनेट पर भले ही मीम बन गया हो, लेकिन इसके पीछे की सच्चाई बेहद गंभीर है।







