Chirag Paswan: बिहार चुनाव 2025 को लेकर एनडीए के अंदर जो सीट बंटवारे की खींचतान चल रही थी, वह अब खत्म होती दिख रही है। जिस Chirag Paswan (एलजेपीआर) की पार्टी की तरफ से बार-बार यह कहा जा रहा था कि उन्हें 45 से 54 सीटें चाहिए और वे मुख्यमंत्री पद के चेहरे के रूप में भी दावा कर सकते हैं, वही Chirag Paswan अब लगता है कि मान गए हैं।
दिल्ली में धर्मेंद्र प्रधान, विनोद तावड़े और Chirag Paswan के बीच हुई बैठक के बाद यह संकेत मिल रहा है कि सीट बंटवारे पर सहमति बन गई है। बताया जा रहा है कि इस मुलाकात ने चिराग की नाराजगी खत्म कर दी है।

क्यों नाराज थे Chirag Paswan?
Chirag Paswanकी नाराजगी की असली वजह थी सीटों की संख्या। उन्होंने शुरू में 45–54 सीटों की मांग की थी, लेकिन जेडीयू और बीजेपी दोनों के बीच पहले से फिक्स फॉर्मूला होने के कारण यह संभव नहीं था।
जेडीयू ने पहले ही साफ कर दिया था कि बिहार में वह “बड़े भाई की भूमिका” में रहेगा, यानी उसकी सीटें बीजेपी के बराबर या एक ज्यादा होंगी। ऐसे में एलजेपीआर के लिए 50 सीटें निकालना मुश्किल था।
बीजेपी ने कैसे किया डैमेज कंट्रोल?
बीजेपी को 2020 का अनुभव याद था — जब Chirag Paswan की पार्टी ने अलग होकर चुनाव लड़ा था और जेडीयू को 25 से ज्यादा सीटों पर नुकसान झेलना पड़ा था। इस बार बीजेपी नहीं चाहती थी कि ऐसा दोबारा हो।
इसीलिए धर्मेंद्र प्रधान और विनोद तावड़े लगातार सहयोगियों के साथ बैठक कर रहे हैं।
पहले जीतन राम मांझी और फिर उपेंद्र कुशवाहा को मनाया गया, और अब Chirag Paswan भी माने जाते दिख रहे हैं।

फाइनल सीट बंटवारा (सूत्रों के अनुसार)
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जेडीयू – 103 सीटें
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बीजेपी – 102 सीटें
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एलजेपी (रामविलास) – 25 सीटें
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हम (जीतन राम मांझी) – 7 सीटें
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आरएलएम (उपेंद्र कुशवाहा) – 6 सीटें
कुल मिलाकर यह फार्मूला सभी दलों को संतुलित रखता है। सूत्रों के मुताबिक, जिन दलों को कम सीटें मिली हैं, उन्हें एमएलसी या मंत्री पदों के जरिए “मैनेज” करने की रणनीति भी बनाई गई है।
Chirag Paswan का फैक्टर
Chirag Paswan अब बिहार की राजनीति में एक मजबूत फैक्टर बन चुके हैं।
लोकसभा चुनाव में उन्होंने 100% स्ट्राइक रेट के साथ अपनी पार्टी की सभी 5 सीटें जीतीं, जिससे यह साबित हुआ कि उनका 5–6% का वोट बैंक अभी भी मजबूत है। यही वजह है कि एनडीए उन्हें किसी भी कीमत पर खोना नहीं चाहता था।
- सीट शेयरिंग पर आधिकारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस
- उम्मीदवारों के नामों का ऐलान
बीजेपी और एनडीए ने अपने सभी सहयोगियों को साथ रखकर यह संदेश देने की कोशिश की है कि “गठबंधन में सब चंगा है।”






