Lata Singh, RCP Singh,Nalanda: बिहार की राजनीति में एक बार फिर दिलचस्प मोड़ आया है। नालंदा जिले की अस्थावां विधानसभा सीट से जनसुराज पार्टी ने पूर्व केंद्रीय मंत्री और कभी नितीश कुमार के बेहद करीबी रहे RCP Singh की बेटी Lata Singh को ticket देकर सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। इस फैसले से नालंदा की सियासत में हलचल तेज हो गई है, क्योंकि ये सीट अब तक JDU का मजबूत गढ़ मानी जाती रही है।
कौन हैं Lata Singh?
लता सिंह पेशे से एक वकील हैं और सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करती हैं। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई दिल्ली के DPS आर.के. पुरम से की और फिर दिल्ली यूनिवर्सिटी के मशहूर श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) से ग्रेजुएशन पूरा किया। इसके बाद उन्होंने लॉ की डिग्री ली और अपने करियर की शुरुआत पटना हाई कोर्ट से की, जहां उन्होंने तत्कालीन एडवोकेट जनरल ललित किशोर के साथ काम किया। आगे चलकर वो दिल्ली चली गईं और सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक देसाई के साथ काम करने लगीं।

लता सिंह बताती हैं कि उन्होंने बचपन से ही अपने पिता RCP Singh को राजनीति में सक्रिय रूप से देखा है और बिहार के लिए कुछ करने की प्रेरणा उन्हें उन्हीं से मिली। जब उनसे पूछा गया कि जनसुराज पार्टी ने उन्हें अस्थावां से टिकट क्यों दिया, तो उन्होंने कहा कि उन्होंने प्रशांत किशोर (PK) की सोच और उनके मिशन को नजदीक से समझा है। उनके अनुसार, जनसुराज का मकसद बिहार को बदलना है और PK जिस तरह गांव-गांव जाकर जनता से जुड़ रहे हैं, वो उन्हें बेहद प्रेरणादायक लगता है। इसी वजह से उन्होंने इस बदलाव की यात्रा का हिस्सा बनने का निर्णय लिया।
अब अगर अस्थावां सीट की बात करें तो यह नालंदा जिले का हिस्सा है और यहीं स्थित है RCP Singh का पैतृक गांव मुस्तफापुर। 2005 से अब तक यह सीट JDU के कब्जे में रही है और इसे नितीश कुमार का गढ़ माना जाता है। लेकिन जनसुराज ने इसी सीट से RCP Singh की बेटी को उतारकर JDU को सीधी चुनौती दे दी है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस सीट पर जातीय समीकरण और पारिवारिक प्रभाव दोनों ही अहम भूमिका निभाएंगे। RCP Singh कभी JDU के बड़े नेता रहे हैं और अब जब उनकी बेटी विरोधी खेमे से मैदान में हैं, तो मुकाबला और भी दिलचस्प हो गया है।
लता सिंह का चुनाव मैदान में उतरना सिर्फ एक राजनीतिक घटना नहीं, बल्कि नालंदा की राजनीति में नई दिशा की शुरुआत माना जा रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि जनसुराज की यह चाल नितीश कुमार के गढ़ में कितनी असरदार साबित होती है।






