Nitish Kumar, Bihar Election 2025: बिहार की सियासत हमेशा से दिलचस्प रही है। यहां समीकरण पलभर में बदल जाते हैं और गठबंधन एक रात में टूट भी जाते हैं, बन भी जाते हैं। आने वाला Bihar Election 2025 भी कुछ ऐसा ही दिख रहा है—जहां पुरानी दुश्मनियां फिर से दोस्ती में बदल सकती हैं और पुराने साथी अब विरोधी बन चुके हैं।
Nitish Kumar: राजनीति के ‘पलटूराम’ या रणनीतिक मास्टर?
बिहार के मुख्यमंत्री Nitish Kumar को लोग “सुशासन बाबू” के नाम से जानते हैं, लेकिन एक दूसरा नाम भी उनसे जुड़ा है—“पलटूराम”। वजह साफ़ है, उन्होंने बीते दो दशकों में लगभग हर बड़े राजनीतिक खेमे के साथ हाथ मिलाया है।
2000 के दशक की शुरुआत में बीजेपी के साथ मिलकर सत्ता में आए Nitish Kumar ने लालू यादव की आरजेडी के “जंगलराज” के खिलाफ सुशासन का चेहरा बनाया। लेकिन वक्त बदला, 2013 में नरेंद्र मोदी को लेकर मतभेद हुआ और नीतीश ने बीजेपी से नाता तोड़ लिया।

2015 में नीतीश ने लालू यादव के साथ महागठबंधन बनाकर चुनाव जीता। पर 2017 आते-आते उन्होंने फिर पलटी मारी और वापस बीजेपी की गोद में चले गए।
2022 में एक बार फिर उन्होंने एनडीए छोड़ा और आरजेडी के साथ हाथ मिला लिया।
अब चर्चा यही है कि क्या 2025 के चुनाव से पहले नीतीश एक और बड़ा राजनीतिक दांव चलेंगे?
बिहार की जनता क्या सोचती है?
बिहार की जनता Nitish Kumar से नाराज़ भी है, और उम्मीद भी रखती है। एक तरफ लोग कहते हैं कि उन्होंने राज्य में सड़कें, बिजली और शिक्षा में सुधार किया, वहीं दूसरी ओर उनकी बार-बार की “पलटी” ने भरोसे को झटका दिया है।
लोग पूछते हैं — “क्या नीतीश अब भी विकास की राजनीति करेंगे या फिर सिर्फ कुर्सी बचाने की?”
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि Nitish Kumar का जनाधार कमजोर नहीं हुआ है, लेकिन वो पहले जितना प्रभावशाली भी नहीं रहे। युवा वोटर्स अब जातीय राजनीति से ऊपर उठकर रोज़गार और विकास पर ध्यान दे रहे हैं, और यही 2025 के चुनाव का असली मुद्दा बनेगा।

बीजेपी, आरजेडी और नीतीश – कौन किसके साथ?
भाजपा (BJP) Nitish Kumar से दूर जाकर अब बिहार में “मोदी फैक्टर” पर चुनाव लड़ना चाहती है। पार्टी को विश्वास है कि बिना नीतीश के भी वो अच्छा प्रदर्शन कर सकती है।
वहीं आरजेडी की तरफ से तेजस्वी यादव अब पूरी तरह सक्रिय हैं। वह बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और शिक्षा व्यवस्था को लेकर जनता के बीच माहौल बना रहे हैं।
अगर नीतीश, आरजेडी और कांग्रेस साथ रहते हैं, तो महागठबंधन को एकजुट दिखने का फायदा मिलेगा, लेकिन अंदरूनी मतभेद अभी भी बरकरार हैं।
2025 का रण: जनता बनाम राजनीतिक दांव
आगामी Bihar Election 2025 में मुकाबला सिर्फ नीतीश या तेजस्वी तक सीमित नहीं रहेगा। इसमें जनता का मूड सबसे बड़ा फैक्टर होगा। सोशल मीडिया पर युवाओं की नाराज़गी, महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दे चर्चा में हैं।
लोग यह भी सवाल उठा रहे हैं कि 20 साल सत्ता में रहने के बाद नीतीश के पास अब नया एजेंडा क्या है?
क्या जनता फिर से उन्हें मौका देगी, या बदलाव की हवा किसी नए चेहरे को सत्ता तक पहुंचाएगी?
नीतीश के लिए निर्णायक लड़ाई
2025 का चुनाव Nitish Kumar के लिए “अस्तित्व की लड़ाई” बन चुका है। अगर वह इस बार हारते हैं, तो यह उनका आखिरी चुनाव साबित हो सकता है।
वहीं अगर जीतते हैं, तो वो एक बार फिर साबित कर देंगे कि “बिहार की राजनीति में जो नीतीश को कम आंकता है, वो खुद मिट जाता है।”
अब देखना यह है कि आने वाले महीनों में कौन-सा गठबंधन बनता है, कौन टूटता है, और जनता किसे अपना अगला नेता चुनती है।
एक बात तय है — Bihar Election 2025 सिर्फ एक चुनाव नहीं, बल्कि बिहार की सियासी दिशा तय करने वाली निर्णायक जंग होगी।






