Bihar Election: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 (Bihar Election 2025) का बिगुल आखिरकार बज चुका है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुनाव कार्यक्रम का ऐलान किया। इस बार चुनाव सिर्फ दो चरणों में होंगे — जो कि पिछले कई वर्षों में पहली बार है। आयोग ने इसे “लॉजिस्टिक सुधार और प्रशासनिक कुशलता” का नतीजा बताया।
चुनाव की तारीखें और टाइमटेबल
पहले चरण का मतदान 6 नवंबर को होगा, जबकि दूसरा चरण 11 नवंबर को। नतीजों की गिनती 14 नवंबर को की जाएगी।
पहले चरण के लिए नामांकन की अंतिम तारीख 17 अक्टूबर रखी गई है और दूसरे चरण के लिए 20 अक्टूबर।
चुनाव आयोग के अनुसार इस बार 7 करोड़ 43 लाख मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे, जिनमें 14 लाख नए वोटर शामिल हैं।
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पिछले चुनावों पर नजर डालें तो यह पहला मौका है जब बिहार में विधानसभा चुनाव सिर्फ दो चरणों में संपन्न होंगे।
2005 में 4 चरण, 2010 में 6 चरण, 2015 में 5 चरण और 2020 में 3 चरणों में वोटिंग हुई थी। यानी बिहार की राजनीतिक मशीनरी अब पहले से अधिक सक्षम और संगठित मानी जा रही है।
नया ऐप: “ECI नेट” — चुनाव की रियल टाइम मॉनिटरिंग
आयोग ने इस बार एक नया एप्लिकेशन लॉन्च किया है — “ECI NET”, जिसे “मदर ऑफ ऑल इलेक्शन ऐप्स” कहा जा रहा है।
यह एक सिंगल विंडो सिस्टम होगा जिससे चुनाव से जुड़ी हर प्रक्रिया जैसे पोलिंग बूथ मॉनिटरिंग, उम्मीदवारों की जानकारी, सुरक्षा व्यवस्था, आदि की रियल टाइम ट्रैकिंग की जा सकेगी।
ज्ञानेश कुमार ने बताया कि हर पोलिंग स्टेशन पर Assured Minimum Facilities (AMF) उपलब्ध कराई जाएंगी।
वोटर अगर कार्ड भूल भी जाएं तो 12 वैकल्पिक दस्तावेज़ों से पहचान साबित कर सकते हैं।
85 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों और दिव्यांगों के लिए होम वोटिंग की सुविधा दी जाएगी, बशर्ते वे फॉर्म 12D भरें।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ: आयोग पर विपक्ष का हमला
चुनाव कार्यक्रम के ऐलान के तुरंत बाद बिहार की राजनीति गरमा गई।
पप्पू यादव ने X (ट्विटर) पर लिखा – “इतना बेशर्म चुनाव आयोग कभी नहीं देखा। बीजेपी मुख्यालय से कार्यक्रम भेजा गया और मुख्य चुनाव आयुक्त ने बस पढ़ दिया।”
कांग्रेस के पवन खेड़ा ने भी कहा कि “चुनाव आयोग ने तब तक इंतजार किया जब तक खातों में ₹10,000 पहुंच नहीं गए।”
वहीं, बीजेपी और एनडीए की ओर से नेताओं ने आयोग के फैसले का स्वागत किया और अपने कामकाज को जनता के बीच प्रचारित किया।
पटना के एक बीजेपी विधायक ने कहा — “बिहार में सड़कें बनीं, पुल बने, मेट्रो चली, बहनों को ₹10,000 मिल रहे हैं, किसानों के खातों में पैसा जा रहा है। जनता तय कर चुकी है, नीतीश जी फिर मुख्यमंत्री बनेंगे।”

जनता और विपक्ष की चुनौती
विपक्षी दलों का कहना है कि चुनाव आयोग को “रेफरी” की भूमिका में रहना चाहिए, न कि किसी पार्टी के एजेंडे पर काम करना चाहिए।
आरजेडी और कांग्रेस लगातार यह मांग कर रहे हैं कि चुनाव प्रचार में “नफरत की भाषा” पर रोक लगे और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो।
राजनीतिक पंडितों के अनुसार इस बार बिहार में मुकाबला केवल एनडीए बनाम महागठबंधन नहीं, बल्कि “नीतीश बनाम बदलाव” के बीच है।
लोग इस बार रोजगार, महंगाई और सुशासन को लेकर वोट करने का मन बना रहे हैं।
2020 के चुनाव और इस बार की उम्मीदें
पिछले चुनाव यानी 2020 में, आरजेडी 75 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी थी, लेकिन एनडीए गठबंधन (बीजेपी + जेडीयू) ने 117 सीटों के साथ बहुमत हासिल किया था।
बीजेपी को 74 और जेडीयू को 43 सीटें मिली थीं।
अब जबकि बिहार में दो-फेज चुनाव हो रहे हैं, राजनीतिक समीकरण फिर बदलने की पूरी संभावना है।
Bihar Election 2025 न केवल नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव के लिए, बल्कि पूरे बिहार की सियासत के लिए निर्णायक साबित होगा।
दो चरणों में होने वाले इस चुनाव में मतदाताओं की भूमिका पहले से कहीं अधिक अहम है।
अब देखना यह है कि जनता किसे मौका देती है — “सुशासन” या “बदलाव”?





