Bagram Airbase Issue: क्या आपने कभी सोचा था कि India और Pakistan किसी बात पर एक साथ खड़े होंगे? मौजूदा हालात देखकर शायद ही कोई ऐसा मानता, लेकिन इस बार मामला कुछ अलग है। दोनों देश एक ही प्लान के खिलाफ एकजुट हैं — और वो प्लान है अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump का। ये पूरा मामला जुड़ा है Afghanistan के मशहूर Bagram Airbase से।

क्या है Bagram Airbase और यह अफगानिस्तान के लिए इतना अहम क्यों है?
Bagram अफगानिस्तान का सबसे बड़ा एयरबेस है, जो Parwan Province में स्थित है, काबुल से करीब 60 किलोमीटर उत्तर में। इसे 1950 के दशक में सोवियत यूनियन की मदद से बनाया गया था। उस वक्त अमेरिका और सोवियत संघ दोनों ही अफगानिस्तान में अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहे थे। बाद में 1979 से 1989 के बीच चले Soviet-Afghan War के दौरान यह सोवियत सेना का अहम बेस बन गया।
1990 के दशक में सोवियत संघ की वापसी के बाद यह बेस Taliban और Northern Alliance की लड़ाई का फ्रंट बन गया। फिर आया साल 2001, जब 9/11 हमले के बाद अमेरिका ने “War on Terror” शुरू की। सबसे पहले जिन ठिकानों को अमेरिका ने अपने कब्जे में लिया, उनमें Bagram सबसे अहम था। अमेरिका ने अरबों डॉलर खर्च कर इसे एक हाईटेक बेस में तब्दील कर दिया। यहां 3 किलोमीटर लंबे दो रनवे बनाए गए, जिन पर फाइटर जेट्स, बॉम्बर प्लेन्स, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट्स और ड्रोन उतर सकते थे।
यहां हजारों सैनिक, कॉन्ट्रैक्टर्स और सपोर्ट स्टाफ रहते थे। अस्पताल और इंटेलिजेंस यूनिट भी मौजूद थी। लेकिन 2021 में Joe Biden प्रशासन ने अमेरिका की अफगानिस्तान से वापसी करा दी। इस वापसी के साथ ही अमेरिका की लंबी सैन्य मौजूदगी का एक अध्याय खत्म हुआ। इसके बाद Bagram एयरबेस का कंट्रोल अफगान नेशनल सिक्योरिटी फोर्सेज को दिया गया, और कुछ ही समय में Taliban ने इस पर कब्जा कर लिया।
क्या डोनाल्ड ट्रंप की Bagram Airbase वापस लेने की मांग एक नया वैश्विक संकट खड़ा कर देगी?
अब Donald Trump ने फिर से इस बेस को वापस लेने की बात कही है। 21 सितंबर को उन्होंने अफगानिस्तान को चेतावनी देते हुए कहा, “अगर Bagram वापस नहीं मिला तो bad things are going to happen.” इस बयान के बाद Taliban ने तुरंत पलटवार करते हुए कहा कि अफगान किसी भी हालत में अपनी जमीन किसी को नहीं देंगे।
इस बयान के बाद रूस में Moscow Format Consultation नाम की बैठक हुई, जिसमें India, Pakistan, China, Russia, Iran, Kazakhstan, Kyrgyzstan, Tajikistan, Uzbekistan और Belarus जैसे देश शामिल हुए। 7 अक्टूबर को इन सभी देशों ने एक joint statement जारी किया। इसमें नाम भले ही Bagram का नहीं लिया गया, लेकिन संकेत साफ थे — अफगानिस्तान या उसके आसपास किसी भी विदेशी सैन्य ढांचे की तैनाती स्वीकार नहीं की जाएगी।
दिलचस्प बात यह है कि इस बार India और Pakistan दोनों का रुख एक जैसा रहा — अमेरिका की मांग के खिलाफ। और यही बात इस पूरे मामले को और खास बना देती है। जल्द ही अफगानिस्तान के विदेश मंत्री Amir Khan Muttaqi के भारत आने की खबर भी है, जिससे संकेत मिलते हैं कि ये मुद्दा अब और गर्म होने वाला है।






