दिल्ली की राजनीति से शुरू हुआ विवाद पंजाब तक पहुंचा
दिल्ली की राजनीति में एक वीडियो ने ऐसा तूफान खड़ा किया कि मामला अब दो राज्यों की संस्थाओं के आमने-सामने आने तक पहुंच गया है। Atishi Video Controversy के बीच दिल्ली विधानसभा ने पंजाब पुलिस को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस पंजाब के डीजीपी, साइबर क्राइम के स्पेशल डीजीपी और जालंधर के पुलिस कमिश्नर को भेजा गया है। विधानसभा ने 48 घंटे के भीतर जवाब मांगा है और उस फॉरेंसिक रिपोर्ट को भी तलब किया है, जिसके आधार पर पंजाब पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी।
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वीडियो से कैसे शुरू हुआ पूरा मामला
पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब दिल्ली विधानसभा की कार्यवाही का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। आरोप लगाया गया कि दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और आम आदमी पार्टी की विधायक Atishi ने सिख गुरुओं को लेकर आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया।
इसके बाद 7 जनवरी को दिल्ली सरकार के मंत्री Kapil Mishra ने वही वीडियो क्लिप अपने आधिकारिक X हैंडल पर शेयर कर दी। यहीं से मामला दिल्ली से निकलकर पंजाब के जालंधर तक पहुंच गया।
पंजाब में दर्ज हुई FIR और फॉरेंसिक रिपोर्ट का दावा
जालंधर में इकबाल सिंह नाम के एक व्यक्ति की शिकायत पर पंजाब पुलिस ने कपिल मिश्रा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली। पंजाब पुलिस ने दावा किया कि वीडियो की जांच मोहाली की फॉरेंसिक लैब में कराई गई है।
पुलिस के मुताबिक जांच में यह सामने आया कि वीडियो में आतिशी ने “गुरु” शब्द का इस्तेमाल किया ही नहीं था। पंजाब पुलिस ने बयान जारी कर कहा कि वीडियो के साथ छेड़छाड़ की गई थी। इसी दावे के बाद विवाद ने और गंभीर रूप ले लिया।
दिल्ली विधानसभा ने क्यों भेजा नोटिस
दिल्ली विधानसभा में इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। विधानसभा स्पीकर Vijender Gupta ने कहा कि सदन की कार्यवाही की रिकॉर्डिंग विधानसभा की संपत्ति होती है।
उनका कहना था कि किसी दूसरे राज्य की पुलिस द्वारा विधानसभा की रिकॉर्डिंग पर एफआईआर दर्ज करना सदन के विशेषाधिकारों का उल्लंघन है। इसे सीधे तौर पर breach of privilege बताया गया। इसी आधार पर पंजाब पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को नोटिस जारी किया गया।

राजनीति भी पूरे रंग में
इस विवाद में राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई। कपिल मिश्रा ने कहा कि एफआईआर और पुलिस कार्रवाई से वह डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब पुलिस अपने राज्य के अपराध छोड़कर आम आदमी पार्टी के नेताओं को बचाने में लगी है।
वहीं पंजाब बीजेपी अध्यक्ष Sunil Jakhar ने सवाल उठाया कि अगर फॉरेंसिक जांच एक दिन में हो सकती है, तो अन्य वायरल वीडियो की जांच में देरी क्यों हो रही है।
AAP का बचाव और सिख संगठनों की नाराजगी
आम आदमी पार्टी ने वीडियो को फर्जी बताते हुए बीजेपी पर टैंपरिंग का आरोप लगाया। पंजाब के मुख्यमंत्री Bhagwant Mann ने कहा कि वीडियो के साथ जानबूझकर छेड़छाड़ की गई है।
खुद आतिशी ने भी आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि वह ऐसे परिवार से आती हैं जो सिख धर्म का सम्मान करता है और वह गुरु साहब का अपमान करने की कल्पना भी नहीं कर सकतीं।
दूसरी तरफ सिख संगठनों की प्रतिक्रिया कड़ी रही। Shiromani Gurdwara Parbandhak Committee के अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने कथित बयान को आपत्तिजनक बताते हुए कार्रवाई की मांग की। अकाल तख्त के जत्थेदार Giani Kuldeep Singh Gargaj ने भी इसे अमर्यादित व्यवहार करार दिया।
संवैधानिक बहस में बदला मामला
अब Atishi Video Controversy सिर्फ एक वीडियो या एक एफआईआर तक सीमित नहीं रह गया है। यह दो राज्यों की संस्थाओं के अधिकार क्षेत्र, विधानसभा के विशेषाधिकार और पुलिस की भूमिका पर बड़ी संवैधानिक बहस बन चुका है।
एक तरफ दिल्ली विधानसभा अपने अधिकारों की बात कर रही है, तो दूसरी तरफ पंजाब पुलिस अपनी जांच को सही ठहरा रही है। आने वाले दिनों में अदालत और संवैधानिक संस्थाएं तय करेंगी कि इस टकराव की दिशा क्या होगी।






