America Nuclear Test : दुनिया में फिर एक बार परमाणु तनाव बढ़ने लगा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि अमेरिका अब दोबारा न्यूक्लियर टेस्टिंग शुरू करेगा। यह ऐलान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका ने 1992 के बाद पहली बार किसी परमाणु परीक्षण की बात कही है। अगर यह आदेश लागू होता है, तो अमेरिका करीब तीन दशक बाद परमाणु हथियार का परीक्षण करेगा।
इस फैसले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक हलचल मचा दी है। सबसे तीखी प्रतिक्रिया ईरान की ओर से आई।
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America Nuclear Test : ईरान बोला – “न्यूक्लियर आर्म्ड बुल्ली” बन चुका है अमेरिका
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराची ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर एक कड़ा बयान जारी किया।
उन्होंने लिखा —
“एक न्यूक्लियर आर्म्ड बुल्ली देश, जिसने अपने डिपार्टमेंट ऑफ डिफेंस का नाम बदलकर डिपार्टमेंट ऑफ वॉर कर दिया है, अब फिर से परमाणु हथियारों का परीक्षण शुरू करने जा रहा है।”
अराची ने कहा कि अमेरिका लगातार अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन कर रहा है और ईरान के शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम को बदनाम करने की कोशिश में है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिका ईरान की सुरक्षित परमाणु सुविधाओं पर हमले की धमकी दे रहा है।
अराची ने लिखा —
“न्यूक्लियर टेस्ट शुरू करना एक गैर-जिम्मेदार और रिग्रेसिव कदम है। यह अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। दुनिया को ऐसे भयानक हथियारों के प्रसार को सामान्य बनाने के खिलाफ एकजुट होना चाहिए और अमेरिका को जवाबदेह ठहराना चाहिए।”
रूस ने दी चेतावनी – अगर अमेरिका करेगा टेस्ट, तो हम भी तैयार हैं
अमेरिका के बयान के बाद रूस ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा —
“रूस ने अभी तक कोई परमाणु परीक्षण नहीं किया है। लेकिन अगर वाशिंगटन ऐसा करता है, तो मॉस्को भी परीक्षण शुरू कर देगा।”
उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका की तरफ से रूस को इस निर्णय की कोई पूर्व जानकारी नहीं दी गई थी।
रूस ने ट्रंप प्रशासन के रवैये को “उकसाने वाला कदम” बताया है।

ट्रंप ने यह बयान क्यों दिया?
दरअसल, 26 अक्टूबर को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने दावा किया था कि रूस ने न्यूक्लियर-पावर्ड मिसाइल का सफल परीक्षण किया है।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था —
“पुतिन जो कर रहे हैं, वो ठीक नहीं है।”
ट्रंप ने रूस पर आरोप लगाया कि वह यूक्रेन जंग को खत्म करने में कोई गंभीरता नहीं दिखा रहा।
यही नहीं, ट्रंप ने अपनी नाराजगी के चलते पुतिन से मुलाकात भी रद्द कर दी।
अब उनका यह न्यूक्लियर टेस्टिंग वाला ऐलान, विशेषज्ञों के मुताबिक, रूस को सीधा जवाब देने का तरीका माना जा रहा है।
ग्लोबल शांति पर मंडराया खतरा
ट्रंप का यह कदम न सिर्फ रूस और ईरान बल्कि पूरी दुनिया को चिंता में डाल रहा है।
संयुक्त राष्ट्र की कई पूर्व रिपोर्ट्स में कहा गया है कि किसी भी तरह का न्यूक्लियर टेस्टिंग फिर से शुरू होना वैश्विक अस्थिरता को बढ़ा सकता है।
अभी दुनिया COVID के बाद आर्थिक और राजनीतिक तनाव झेल रही है, ऐसे में यह कदम अंतरराष्ट्रीय संबंधों में नई ठंड जंग (Cold War 2.0) की नींव रख सकता है।
फिलहाल, ईरान और रूस दोनों ने संकेत दिए हैं कि अगर अमेरिका पीछे नहीं हटता, तो वे भी मजबूत जवाबी कदम उठाएंगे।
अब देखना होगा कि क्या ट्रंप प्रशासन इस निर्णय पर कायम रहता है या ग्लोबल प्रेशर में कुछ नरमी दिखाता है।







