जब भी भारत की डिजिटल क्रांति, आधार (Aadhaar), यूपीआई (UPI) या इंफोसिस (Infosys) की बात होती है, तो Nandan Nilekani का नाम प्रमुखता से सामने आता है। वे उन चुनिंदा भारतीयों में शामिल हैं जिन्होंने उद्योग, तकनीक और सरकारी नीतियों—तीनों क्षेत्रों में अपनी गहरी छाप छोड़ी है।
एक सफल उद्योगपति, टेक्नोलॉजी लीडर, निवेशक, लेखक और नीति विशेषज्ञ के रूप में नंदन नीलेकणी ने पिछले चार दशकों में भारत की तकनीकी तस्वीर बदलने में अहम भूमिका निभाई है।
Nandan Nilekani: शुरुआती जीवन और शिक्षा
नंदन मोहन नीलेकणी का जन्म 2 जून 1955 को बेंगलुरु (तत्कालीन बैंगलोर) में हुआ। उनका परिवार मूल रूप से कर्नाटक के सिरसी क्षेत्र से जुड़ा है। उनके पिता मोहन राव नीलेकणी कपड़ा उद्योग में वरिष्ठ पद पर कार्यरत थे।
उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा बिशप कॉटन बॉयज़ स्कूल और धारवाड़ के शिक्षण संस्थानों से पूरी की। इसके बाद उन्होंने आईआईटी बॉम्बे से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री प्राप्त की।
इंफोसिस की स्थापना कैसे हुई?
वर्ष 1978 में नंदन नीलेकणी ने मुंबई स्थित पटनी कंप्यूटर सिस्टम्स में नौकरी शुरू की। यहीं उनकी मुलाकात एन. आर. नारायण मूर्ति से हुई। कुछ वर्षों बाद, 1981 में नारायण मूर्ति, नंदन नीलेकणी और पांच अन्य साथियों ने मिलकर Infosys की स्थापना की। उस समय शायद ही किसी ने सोचा होगा कि यह छोटी-सी कंपनी एक दिन भारत की सबसे बड़ी आईटी कंपनियों में शामिल होगी।
CEO के रूप में शानदार नेतृत्व
नंदन नीलेकणी ने इंफोसिस में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। वर्ष 2002 से 2007 तक वे कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) रहे।
उनके कार्यकाल में कंपनी का कारोबार कई गुना बढ़ा और इंफोसिस वैश्विक आईटी उद्योग की अग्रणी कंपनियों में शामिल हो गई। बाद में वर्ष 2017 में विशाल सिक्का के इस्तीफे के बाद उन्हें दोबारा कंपनी का Non-Executive Chairman बनाया गया, जहां वे आज भी रणनीतिक नेतृत्व प्रदान कर रहे हैं।
आधार (Aadhaar) परियोजना के शिल्पकार
वर्ष 2009 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के आमंत्रण पर नंदन नीलेकणी ने इंफोसिस छोड़कर भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) के संस्थापक अध्यक्ष का पद संभाला। यहीं से शुरू हुई भारत की सबसे बड़ी डिजिटल पहचान परियोजना—आधार (Aadhaar)।
आधार का उद्देश्य देश के प्रत्येक निवासी को एक विशिष्ट पहचान संख्या उपलब्ध कराना था, जिससे सरकारी योजनाओं का लाभ सही व्यक्ति तक पहुंचे, फर्जी लाभार्थियों पर रोक लगे और डिजिटल सेवाओं को मजबूत आधार मिल सके। आज आधार दुनिया की सबसे बड़ी बायोमेट्रिक पहचान प्रणाली मानी जाती है।
डिजिटल इंडिया और UPI में योगदान
आधार के अलावा नंदन नीलेकणी ने भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (Digital Public Infrastructure) को मजबूत बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
वे डिजिटल भुगतान व्यवस्था को बढ़ावा देने वाली कई समितियों से जुड़े रहे। Unified Payments Interface (UPI) जैसी प्रणाली को आगे बढ़ाने के लिए भी उन्होंने विभिन्न स्तरों पर योगदान दिया। आज यूपीआई भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के कई देशों के लिए एक मॉडल बन चुका है।
सरकारों के भरोसेमंद तकनीकी विशेषज्ञ
नंदन नीलेकणी की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि अलग-अलग राजनीतिक दलों की सरकारों ने भी उनकी विशेषज्ञता पर भरोसा जताया।
उन्होंने समय-समय पर विभिन्न सरकारी समितियों में काम किया, जिनका संबंध डिजिटल भुगतान, सार्वजनिक नीति, तकनीकी सुधार और डिजिटल गवर्नेंस से रहा। हाल ही में केंद्र सरकार ने उन्हें परीक्षा सुधार टास्क फोर्स का अध्यक्ष भी नियुक्त किया है। यह समिति परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और तकनीक आधारित बनाने के सुझाव देगी।
राजनीति में भी रखा कदम
साल 2014 में नंदन नीलेकणी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हुए और बेंगलुरु दक्षिण लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा। हालांकि वे चुनाव नहीं जीत सके और इसके बाद सक्रिय राजनीति से लगभग दूर हो गए। बाद में उन्होंने फिर से तकनीक, निवेश और सार्वजनिक नीति पर अपना ध्यान केंद्रित किया।
लेखक भी हैं नंदन नीलेकणी
व्यवसाय और तकनीक के अलावा नंदन नीलेकणी लेखन के क्षेत्र में भी सक्रिय रहे हैं।
उनकी प्रमुख पुस्तकें हैं—
- Imagining India: The Idea of a Renewed Nation
- Rebooting India
इन पुस्तकों में उन्होंने भारत के भविष्य, तकनीकी बदलाव, प्रशासनिक सुधार और डिजिटल अर्थव्यवस्था पर अपने विचार साझा किए हैं।
निवेशक और समाजसेवी
नंदन नीलेकणी देश के प्रमुख एंजेल निवेशकों में भी शामिल हैं। उन्होंने कई भारतीय स्टार्टअप्स में निवेश किया है।
वे अपनी पत्नी रोहिणी नीलेकणी के साथ शिक्षा, नवाचार और सामाजिक विकास के क्षेत्र में भी सक्रिय हैं। दोनों ने अपनी संपत्ति का बड़ा हिस्सा परोपकारी कार्यों के लिए समर्पित करने की घोषणा की थी। उन्होंने EkStep जैसी पहल के माध्यम से बच्चों की शिक्षा और सीखने की गुणवत्ता सुधारने के लिए भी काम किया है।
सम्मान और पुरस्कार
नंदन नीलेकणी को उनके योगदान के लिए कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिल चुके हैं। इनमें प्रमुख हैं—
- पद्म भूषण (2006)
- TIME Magazine की Time 100 सूची में स्थान
- Forbes Asia द्वारा सम्मान
- IIT Bombay से मानद उपाधि
- कई अंतरराष्ट्रीय नेतृत्व और नवाचार पुरस्कार
क्यों खास हैं Nandan Nilekani?
आज जब भारत डिजिटल गवर्नेंस, डिजिटल भुगतान, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और तकनीकी नवाचार की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है, तब नंदन नीलेकणी का अनुभव और दृष्टिकोण पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।
इंफोसिस जैसी वैश्विक कंपनी की स्थापना से लेकर आधार जैसी महत्वाकांक्षी परियोजना का नेतृत्व करने और डिजिटल इंडिया के विकास में योगदान देने तक, उन्होंने यह साबित किया है कि तकनीक केवल उद्योग को नहीं बल्कि करोड़ों लोगों के जीवन को भी बदल सकती है। इसी वजह से Nandan Nilekani को भारत की डिजिटल क्रांति के सबसे प्रमुख चेहरों में गिना जाता है।




