देश में परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए केंद्र सरकार ने एक नई Exam Reform Task Force का गठन किया है। इस समिति की अध्यक्षता इंफोसिस के सह-संस्थापक Nandan Nilekani करेंगे। Nandan Nilekani Exam Reform Task Force के गठन के साथ एक बार फिर नीलेकणी सरकार के महत्वपूर्ण सुधार कार्यक्रम का हिस्सा बने हैं।
तकनीक और डिजिटल गवर्नेंस के क्षेत्र में लंबे अनुभव वाले Nandan Nilekani पिछले करीब दो दशकों से अलग-अलग सरकारों के साथ कई अहम परियोजनाओं में काम कर चुके हैं।
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पहले भी परीक्षा सुधार समिति का हिस्सा रह चुके हैं
Nandan Nilekani इससे पहले भी परीक्षा प्रणाली से जुड़े एक महत्वपूर्ण पैनल का हिस्सा रह चुके हैं।
साल 2019 में सर्वोच्च न्यायालय ने सेवानिवृत्त न्यायाधीश जी.एस. सिंहवी की अध्यक्षता में सात सदस्यीय समिति बनाई थी। इस समिति को SSC CGL/CHSL 2017 परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच और सुधार संबंधी सुझाव देने की जिम्मेदारी दी गई थी।
समिति ने अपनी रिपोर्ट अदालत को सौंपी थी। बाद में 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने उसी रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा था कि पूरे परीक्षा तंत्र से समझौता होने के पर्याप्त प्रमाण नहीं मिले।
हालांकि, बाद में दायर एक याचिका में दावा किया गया कि समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई और उसके सुझावों का पूर्ण क्रियान्वयन भी नहीं हुआ। अदालत ने व्यापक याचिका खारिज करते हुए आवश्यकता पड़ने पर अलग याचिका दायर करने की छूट दी थी।
NEET विवाद के बाद बनी नई समिति
हाल के महीनों में प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर देशभर में बहस तेज हुई। इसी बीच परीक्षा प्रणाली में सुधार के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने नई टास्क फोर्स गठित की है। सरकार का कहना है कि यह समिति परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने के लिए सुझाव देगी।
कौन हैं Nandan Nilekani?
Nandan Nilekani का जन्म वर्ष 1955 में बेंगलुरु में हुआ था।
उन्होंने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) बॉम्बे से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। अपने करियर की शुरुआत के दौरान उनकी मुलाकात एन.आर. नारायण मूर्ति से हुई और बाद में वर्ष 1981 में दोनों ने अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर Infosys की स्थापना की।
नीलेकणी 2002 से 2007 तक इंफोसिस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) रहे और बाद में कंपनी के विभिन्न नेतृत्व पदों पर भी कार्य किया।
आधार परियोजना में निभाई अहम भूमिका
वर्ष 2009 में तत्कालीन केंद्र सरकार ने Nandan Nilekani को भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) का संस्थापक अध्यक्ष नियुक्त किया।
कैबिनेट मंत्री के दर्जे के साथ उन्होंने देश की महत्वाकांक्षी आधार (Aadhaar) परियोजना का नेतृत्व किया। आधार प्रणाली को लागू करने और डिजिटल पहचान तंत्र विकसित करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है।
यूपीए और एनडीए दोनों सरकारों के साथ काम
Nandan Nilekani उन चुनिंदा तकनीकी विशेषज्ञों में शामिल हैं जिन्होंने अलग-अलग राजनीतिक दलों की सरकारों के साथ महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर काम किया है।
आधार परियोजना की शुरुआत यूपीए सरकार के दौरान हुई, जबकि बाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने इसे आगे बढ़ाते हुए विभिन्न सरकारी योजनाओं और सेवाओं में व्यापक रूप से लागू किया।नोटबंदी के बाद भी उन्हें डिजिटल भुगतान प्रणाली को मजबूत करने के लिए गठित समिति में शामिल किया गया था।
उन्होंने भारतीय रिजर्व बैंक की High-Level Committee on Deepening of Digital Payments में भी काम किया और वर्ष 2021 में उन्हें Open Network for Digital Commerce (ONDC) परिषद में भी शामिल किया गया।
राजनीति में भी आजमा चुके हैं किस्मत
वर्ष 2014 में Nandan Nilekani ने सक्रिय राजनीति में भी कदम रखा था। उन्होंने यूआईडीएआई का पद छोड़कर कांग्रेस के टिकट पर बेंगलुरु दक्षिण लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार अनंत कुमार से चुनाव हार गए।
इसके बाद उन्होंने फिर से तकनीक और सार्वजनिक नीति से जुड़े कार्यों पर अपना ध्यान केंद्रित किया।
परीक्षा सुधार टास्क फोर्स में कौन-कौन हैं?
केंद्र सरकार द्वारा गठित नई परीक्षा सुधार टास्क फोर्स में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल किए गए हैं।
समिति में शामिल प्रमुख सदस्य हैं:
- Nandan Nilekani (तकनीकी विशेषज्ञ एवं अध्यक्ष)
- पूर्व इसरो प्रमुख एस. सोमनाथ
- पूर्व इंटेलिजेंस ब्यूरो निदेशक तपन डेका
- आईआईटी मद्रास के निदेशक वी. कामकोटी
- पूर्व शिक्षा सचिव अनीता करवाल
- लॉजिस्टिक्स विशेषज्ञ अमृत लाल मीणा
सरकार के अनुसार यह बहु-विषयक समिति परीक्षा प्रणाली में तकनीकी, प्रशासनिक और सुरक्षा सुधारों के लिए सुझाव देगी।




