Indian Births Abroad Report 2024 ने विदेशों में रह रहे भारतीय समुदाय की बदलती जनसांख्यिकी (Demography) की एक दिलचस्प तस्वीर पेश की है। भारत सरकार की सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (CRS) रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024 में 140 देशों में स्थित 182 भारतीय मिशनों ने 66,413 जन्म और 11,383 भारतीय नागरिकों की मौतें दर्ज कीं। ये आंकड़े बताते हैं कि भारतीय परिवार किन देशों में तेजी से बस रहे हैं और किन क्षेत्रों में भारतीय प्रवासी समुदाय अब उम्रदराज़ हो रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, 2019 की तुलना में विदेशों में भारतीय नागरिकों के जन्म पंजीकरण में 42.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वहीं, इसी अवधि में विदेशों में भारतीय नागरिकों की दर्ज मौतों में 53 प्रतिशत से अधिक का इजाफा हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव भारतीय प्रवास, रोजगार, शिक्षा और वैश्विक अवसरों के विस्तार को दर्शाता है।
यूएई और ब्रिटेन बने भारतीय परिवारों की पहली पसंद
Indian Births Abroad Report 2024 के अनुसार, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) विदेशों में भारतीय परिवारों का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है। दुबई और अबू धाबी स्थित भारतीय मिशनों में वर्ष 2024 के दौरान 19,317 जन्म दर्ज किए गए, जो किसी भी अन्य देश से कहीं अधिक हैं। वहीं, यहां 2,571 भारतीय नागरिकों की मौतें भी दर्ज हुईं, जो वहां मौजूद विशाल भारतीय आबादी को दर्शाती हैं।
ब्रिटेन भी भारतीय परिवारों के लिए तेजी से उभरता केंद्र बना हुआ है। लंदन, बर्मिंघम और एडिनबर्ग स्थित भारतीय मिशनों में 12,896 जन्म दर्ज हुए, जबकि केवल 329 मौतें रिकॉर्ड की गईं। जन्म और मृत्यु के बीच यह बड़ा अंतर दर्शाता है कि बड़ी संख्या में युवा भारतीय पेशेवर, छात्र और परिवार ब्रिटेन में बस रहे हैं।
ऑस्ट्रेलिया में भी भारतीय समुदाय का विस्तार जारी है। कैनबरा, मेलबर्न और पर्थ स्थित भारतीय मिशनों में 3,093 जन्म और 118 मौतें दर्ज की गईं। वहीं, जर्मनी के चार भारतीय मिशनों में 2,558 जन्म तथा 137 मौतें रिकॉर्ड हुईं। इटली में यह आंकड़ा 2,455 जन्म और 374 मौतों तक पहुंचा।
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अमेरिका और कनाडा के आंकड़ों ने क्यों चौंकाया?
Indian Births Abroad Report 2024 का सबसे दिलचस्प पहलू उत्तर अमेरिका से सामने आया। अमेरिका और कनाडा में भारतीय मिशनों ने जन्मों की तुलना में कहीं अधिक मौतें दर्ज कीं।
अमेरिका के न्यूयॉर्क, सैन फ्रांसिस्को, अटलांटा और वॉशिंगटन डीसी स्थित भारतीय मिशनों में पूरे वर्ष केवल 31 जन्म, जबकि 648 मौतें दर्ज हुईं। अकेले सैन फ्रांसिस्को में 304 मौतें और केवल 13 जन्म दर्ज किए गए।
कनाडा में भी स्थिति लगभग ऐसी ही रही। ओटावा, टोरंटो और वैंकूवर स्थित भारतीय मिशनों ने 15 जन्म और 388 मौतें दर्ज कीं।
विशेषज्ञ बताते हैं कि इसका मुख्य कारण स्थानीय नागरिकता कानून हैं। अमेरिका और कनाडा में जन्म लेने वाले बच्चों को जन्म के साथ ही वहां की नागरिकता मिल जाती है, इसलिए अधिकांश परिवार भारतीय मिशनों में उनके जन्म का पंजीकरण नहीं कराते। वहीं, मौतों की संख्या अधिक होने का कारण वहां लंबे समय से बसे भारतीय प्रवासी, वरिष्ठ नागरिक और परिवार से मिलने गए बुजुर्ग माने जा रहे हैं, जिनकी मृत्यु के बाद कानूनी प्रक्रियाओं के लिए भारतीय मिशनों में पंजीकरण कराया जाता है।

खाड़ी देशों में युवा आबादी बढ़ी, मौतों के आंकड़े भी बढ़े
Indian Births Abroad Report 2024 यह भी दर्शाती है कि खाड़ी देशों में भारतीय श्रमिकों और परिवारों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
सऊदी अरब के रियाद और जेद्दा स्थित भारतीय मिशनों में 4,200 जन्म दर्ज हुए, लेकिन यहां 2,629 मौतें भी रिकॉर्ड की गईं, जो किसी भी देश में भारतीय नागरिकों की सबसे अधिक दर्ज मौतें हैं।
कुवैत में 2,797 जन्म और 733 मौतें दर्ज की गईं। वहीं, मलेशिया में 423 जन्म के मुकाबले 526 मौतें रिकॉर्ड हुईं, जो वहां अपेक्षाकृत पुराने और स्थापित भारतीय समुदाय की ओर संकेत करती हैं।
रिपोर्ट में लिंग आधारित आंकड़े भी सामने आए हैं। वर्ष 2024 में विदेशों में भारतीय मिशनों ने 8,845 पुरुषों और 1,854 महिलाओं की मौत दर्ज की। दूसरी ओर जन्म पंजीकरण अपेक्षाकृत संतुलित रहा, जिसमें 21,190 लड़कों और 20,024 लड़कियों का पंजीकरण किया गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि Indian Births Abroad Report 2024 केवल जन्म और मृत्यु के आंकड़े नहीं है, बल्कि यह वैश्विक स्तर पर भारतीय प्रवासी समुदाय के बदलते स्वरूप, नए प्रवासन रुझानों और विभिन्न देशों में भारतीय परिवारों की बढ़ती उपस्थिति का महत्वपूर्ण दस्तावेज भी है। आने वाले वर्षों में यह रिपोर्ट भारत की प्रवासी नीतियों, सामाजिक योजनाओं और वैश्विक भारतीय समुदाय से जुड़े फैसलों के लिए भी अहम आधार बन सकती है। (source)




