भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने IIT Madras के अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों से स्नातक होने वाले छात्रों को संबोधित करते हुए Global South Innovation के क्षेत्र में नेतृत्वकारी भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आज दुनिया तेजी से बदल रही है और विकासशील देशों के सामने मौजूद चुनौतियों का समाधान केवल पारंपरिक तरीकों से संभव नहीं है। ऐसे में Global South Innovation को बढ़ावा देने के लिए नई सोच, उन्नत तकनीक और वैश्विक सहयोग की आवश्यकता है। उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे अपनी शिक्षा, कौशल और अनुभव का उपयोग केवल व्यक्तिगत सफलता के लिए ही नहीं बल्कि समाज और मानवता के व्यापक हित में भी करें।
विक्रम मिस्री ने कहा कि भारत लंबे समय से विकासशील देशों के हितों और उनकी आवाज को वैश्विक मंचों पर मजबूत करने की दिशा में कार्य कर रहा है। इसी क्रम में Global South Innovation एक ऐसा क्षेत्र बनकर उभरा है जो स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा और डिजिटल समावेशन जैसी चुनौतियों के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने छात्रों को याद दिलाया कि IIT Madras जैसे संस्थानों से प्राप्त ज्ञान और प्रशिक्षण उन्हें दुनिया की जटिल समस्याओं को समझने और उनके समाधान विकसित करने की क्षमता प्रदान करता है।
Global South Innovation में युवाओं की भूमिका पर जोर
विदेश सचिव ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में नवाचार केवल तकनीकी प्रगति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका संबंध सामाजिक परिवर्तन और समावेशी विकास से भी है। Global South Innovation का उद्देश्य उन देशों और समुदायों की आवश्यकताओं को केंद्र में रखना है जो विकास की प्रक्रिया में विभिन्न चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि युवा पेशेवर और शोधकर्ता नई तकनीकों को स्थानीय जरूरतों के अनुसार ढाल सकते हैं। इससे स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने, कृषि उत्पादकता सुधारने, शिक्षा को अधिक सुलभ बनाने और पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने में मदद मिल सकती है। उनके अनुसार Global South Innovation का वास्तविक उद्देश्य ऐसा विकास सुनिश्चित करना है जिसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।
विशेषज्ञों का भी मानना है कि दुनिया की कई बड़ी चुनौतियों के समाधान अब विकासशील देशों से ही सामने आ सकते हैं। भारत, अफ्रीका, दक्षिण एशिया और लैटिन अमेरिका के युवा नवाचार के नए केंद्र बनकर उभर रहे हैं। यही कारण है कि Global South Innovation को भविष्य की वैश्विक विकास रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
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IIT Madras की वैश्विक पहचान और बढ़ता प्रभाव
IIT Madras आज भारत के प्रमुख तकनीकी संस्थानों में से एक माना जाता है और अनुसंधान, नवाचार तथा उद्यमिता के क्षेत्र में इसकी मजबूत पहचान है। संस्थान ने हाल के वर्षों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग और वैश्विक शिक्षा कार्यक्रमों के माध्यम से अपनी पहुंच का विस्तार किया है।
विक्रम मिस्री ने कहा कि IIT Madras जैसे संस्थान Global South Innovation को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। यहां से निकलने वाले छात्र केवल तकनीकी विशेषज्ञ नहीं होते, बल्कि वे ऐसे समस्या-समाधानकर्ता भी बनते हैं जो जटिल सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों का समाधान खोजने की क्षमता रखते हैं।
उन्होंने छात्रों से कहा कि वे अपनी उपलब्धियों को केवल व्यक्तिगत करियर तक सीमित न रखें, बल्कि उन समाजों और देशों के विकास में भी योगदान दें जहां उनकी विशेषज्ञता की आवश्यकता है। इस दृष्टिकोण से Global South Innovation को एक वैश्विक जिम्मेदारी के रूप में देखा जाना चाहिए।
विकासशील देशों के लिए तकनीक और सहयोग का महत्व
अपने संबोधन में विदेश सचिव ने वैश्विक सहयोग की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन, खाद्य सुरक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ्य और डिजिटल असमानता जैसी चुनौतियां किसी एक देश तक सीमित नहीं हैं। इन समस्याओं का समाधान तभी संभव है जब विभिन्न देश और संस्थान मिलकर काम करें।
Global South Innovation के संदर्भ में उन्होंने बताया कि विकासशील देशों के बीच ज्ञान, तकनीक और संसाधनों का आदान-प्रदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत ने पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, स्वास्थ्य तकनीक और शिक्षा के क्षेत्र में कई सफल मॉडल विकसित किए हैं, जिन्हें अन्य देशों के साथ साझा किया जा सकता है।(source)
उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य की अर्थव्यवस्था ज्ञान और नवाचार पर आधारित होगी। ऐसे में जो देश और संस्थान अनुसंधान एवं नवाचार में निवेश करेंगे, वे वैश्विक विकास की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इसी कारण Global South Innovation को केवल एक विचार नहीं बल्कि विकास की आवश्यकता के रूप में देखा जा रहा है।
नवाचार के माध्यम से बेहतर भविष्य की ओर
विक्रम मिस्री ने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे अपने करियर में नए विचारों को अपनाने और जोखिम लेने से न डरें। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई बड़े बदलाव उन लोगों ने किए जिन्होंने पारंपरिक सोच से आगे बढ़कर नई राह चुनी।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि IIT Madras के अंतरराष्ट्रीय स्नातक आने वाले वर्षों में विज्ञान, प्रौद्योगिकी, उद्यमिता और सार्वजनिक नीति जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान देंगे। उनके अनुसार Global South Innovation को आगे बढ़ाने में युवा प्रतिभाओं की भूमिका निर्णायक होगी और यही युवा भविष्य में अधिक समावेशी तथा टिकाऊ विकास का आधार बनेंगे।




