June 6, 2026 11:08 PM

US Iran Conflict: युद्धविराम के बीच फिर बढ़ा TENSION, अमेरिका और ईरान ने किए नए हमले

US Iran Conflict में युद्धविराम के बावजूद बढ़ा सैन्य तनाव US Iran Conflict एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में है। अमेरिका और ईरान के बीच लागू युद्धविराम हाल के दिनों में लगातार दबाव में दिखाई दे रहा है। ताजा घटनाक्रम में अमेरिकी सेना ने दावा किया है

EDITED BY: Rudra Pratap Singh

UPDATED: Saturday, June 6, 2026

US Iran Conflict: युद्धविराम के बीच फिर बढ़ा TENSION, अमेरिका और ईरान ने किए नए हमले

US Iran Conflict में युद्धविराम के बावजूद बढ़ा सैन्य तनाव

US Iran Conflict एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में है। अमेरिका और ईरान के बीच लागू युद्धविराम हाल के दिनों में लगातार दबाव में दिखाई दे रहा है। ताजा घटनाक्रम में अमेरिकी सेना ने दावा किया है कि उसने ईरान द्वारा भेजे गए कई हमलावर ड्रोन को मार गिराया, जबकि जवाबी कार्रवाई में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल हमले किए।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य की ओर चार “वन-वे अटैक ड्रोन” भेजे थे। अमेरिकी सेना का कहना है कि ये ड्रोन क्षेत्रीय समुद्री यातायात के लिए तत्काल खतरा बन सकते थे। इसी कारण उन्हें हवा में ही नष्ट कर दिया गया।

अमेरिकी सेना ने आगे बताया कि ड्रोन खतरे को निष्क्रिय करने के बाद ईरान के दक्षिणी तटीय इलाके में स्थित निगरानी रडार ठिकानों को निशाना बनाया गया। अमेरिका का दावा है कि यह कार्रवाई भविष्य के संभावित हमलों को रोकने और क्षेत्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए की गई।

ईरान ने अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल हमले का किया दावा

US Iran Conflict के ताजा दौर में ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई का दावा किया है। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, ईरान ने कुवैत में स्थित दो अमेरिकी एयरबेस और बहरीन में अमेरिकी नौसेना की सुविधाओं पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं।

हालांकि अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा कि ईरान द्वारा दागी गई सात मिसाइलों में से छह को सफलतापूर्वक रोक दिया गया। अमेरिका का यह भी कहना है कि एक मिसाइल अपने लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही विफल हो गई।

इस घटनाक्रम ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। खाड़ी क्षेत्र दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में शामिल है और यहां किसी भी प्रकार का सैन्य संघर्ष वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों (US Iran Conflict ) के बीच लगातार हो रही जवाबी कार्रवाइयों से यह संकेत मिलता है कि युद्धविराम के बावजूद तनाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।

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कुवैत एयरपोर्ट हमले को लेकर बढ़ा विवाद

US Iran Conflict के दौरान बुधवार को कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुए ड्रोन हमले ने भी विवाद को और बढ़ा दिया। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार इस हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई जबकि 60 से अधिक लोग घायल हुए।

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इस हमले में शामिल होने से इनकार किया है। संगठन का कहना है कि एयरपोर्ट को हुआ नुकसान अमेरिकी मिसाइल इंटरसेप्टर की तकनीकी त्रुटि के कारण हुआ।

दूसरी ओर CENTCOM ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि कुवैत एयरपोर्ट पर हमला जानबूझकर और योजनाबद्ध तरीके से किया गया था। अमेरिकी अधिकारियों का आरोप है कि यह हमला सीधे तौर पर ईरानी कार्रवाई का परिणाम था।

IRGC ने इससे पहले कहा था कि उसने अमेरिकी तेल टैंकर और क़ेश्म द्वीप पर हुए अमेरिकी हमलों के जवाब में खाड़ी क्षेत्र के अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया। दोनों देशों के दावों और आरोपों के बीच वास्तविक स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस जारी है।

US Iran Conflict
 

युद्धविराम वार्ता में गतिरोध, फिर भी जारी है खेल कूटनीति

US Iran Conflict ऐसे समय में और जटिल हो गया है जब दोनों देशों के बीच युद्धविराम को स्थायी बनाने की बातचीत भी ठप पड़ती नजर आ रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रस्तावित समझौते की कुछ शर्तों में बदलाव की मांग की है, जिसके कारण वार्ता आगे नहीं बढ़ पा रही है।

ईरान के विदेश मंत्रालय ने आरोप लगाया है कि अमेरिका लगातार अपनी मांगें बदल रहा है और नई शर्तें जोड़ रहा है। इससे समझौते तक पहुंचना और कठिन हो गया है।

इसके बावजूद एक दिलचस्प घटनाक्रम में अमेरिका ने ईरान की फुटबॉल टीम को आगामी विश्व कप प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए वीजा जारी कर दिया है। टीम 15 जून को लॉस एंजिलिस में अपना पहला मैच खेलने वाली है। यह पहली बार होगा जब किसी ऐसे देश की टीम विश्व कप मेजबान देश में खेलेगी, जिसके साथ मेजबान देश का सक्रिय सैन्य संघर्ष चल रहा है।

विश्लेषकों का मानना है कि खेल कूटनीति दोनों देशों के बीच संवाद का एक सीमित लेकिन महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती है। हालांकि मौजूदा सैन्य तनाव को देखते हुए निकट भविष्य में व्यापक समाधान की संभावना अभी भी अनिश्चित दिखाई देती है। (source)

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