भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर सकारात्मक संकेत सामने आए हैं। India GDP Growth FY26 पर टिप्पणी करते हुए भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) वी अनंत नागेश्वरन ने कहा कि देश की आर्थिक वृद्धि एक संतुलित तस्वीर पेश करती है, जिसमें सकल मूल्य वर्धन (GVA) और व्यय आधारित विकास के लगभग सभी प्रमुख घटकों का योगदान देखने को मिला है।
उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2026 के लिए जारी किए गए सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के अनंतिम आंकड़े यह साबित करते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था नए वित्त वर्ष में मजबूती के साथ प्रवेश कर चुकी है। उनके अनुसार विकास दर, नियंत्रित होती महंगाई और घटते राजकोषीय घाटे ने भारत को एक मजबूत आर्थिक स्थिति में पहुंचा दिया है।

India GDP Growth FY26 पर CEA का बड़ा बयान
ANI से बातचीत में वी अनंत नागेश्वरन ने कहा कि सरकार पहले से मानती थी कि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में है और अब ताजा आंकड़ों ने इस विश्वास को और मजबूत किया है।
उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों का योगदान विकास को संतुलित बना रहा है। विशेष रूप से सेवा क्षेत्र और विनिर्माण क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। उनके मुताबिक विनिर्माण क्षेत्र में लगातार मजबूत वृद्धि देखने को मिली है, जो आर्थिक गतिविधियों में व्यापक सुधार का संकेत है।
मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहा कि यह केवल किसी एक क्षेत्र की उपलब्धि नहीं है, बल्कि विभिन्न आर्थिक क्षेत्रों के संयुक्त प्रदर्शन का परिणाम है। यही कारण है कि भारत की विकास दर को संतुलित और टिकाऊ माना जा रहा है।
खपत और निवेश में सुधार से मिली मजबूती
India GDP Growth FY26 की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक घरेलू मांग में सुधार रहा है। नागेश्वरन ने बताया कि निजी अंतिम उपभोग व्यय (Private Final Consumption Expenditure) ने वित्त वर्ष 2026 में मजबूत वापसी की है।
उन्होंने कहा कि उपभोक्ता खर्च में बढ़ोतरी अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण संकेत है क्योंकि इससे उत्पादन, रोजगार और निवेश को गति मिलती है। जब लोग अधिक खर्च करते हैं तो बाजार में मांग बढ़ती है और उद्योगों को उत्पादन बढ़ाने का अवसर मिलता है।
इसके साथ ही सकल स्थिर पूंजी निर्माण (Gross Fixed Capital Formation) में भी 8.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। यह दर्शाता है कि निजी और सार्वजनिक दोनों क्षेत्रों में निवेश गतिविधियां बढ़ रही हैं।
नागेश्वरन के अनुसार तिमाही आंकड़ों में भी निवेश वृद्धि का यह रुझान स्पष्ट दिखाई देता है। यह आने वाले समय में आर्थिक विस्तार के लिए एक मजबूत आधार तैयार कर सकता है।

वैश्विक चुनौतियों के बावजूद मजबूत आर्थिक संकेत
हालांकि वैश्विक स्तर पर कई अनिश्चितताएं बनी हुई हैं, फिर भी भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूती दिखा रही है। मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव और भू-राजनीतिक घटनाक्रम ऊर्जा कीमतों, महंगाई और वैश्विक विकास दर को प्रभावित कर सकते हैं।
उन्होंने बताया कि कच्चे तेल की कीमतें वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण कारक बनी हुई हैं। यदि आपूर्ति प्रभावित होती है तो इसका असर दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ सकता है, जिसमें भारत भी शामिल है।
इसके बावजूद भारत के आर्थिक संकेतक सकारात्मक बने हुए हैं। अप्रैल महीने में पेट्रोलियम उत्पादों और रत्न-जवाहरात को छोड़कर कोर मर्चेंडाइज निर्यात में दो अंकों की वृद्धि दर्ज की गई। वहीं सेवा क्षेत्र के निर्यात ने भी मजबूत प्रदर्शन जारी रखा।
उच्च आवृत्ति वाले आर्थिक आंकड़े भी यह संकेत दे रहे हैं कि घरेलू मांग और आर्थिक गतिविधियां नए वित्त वर्ष में भी मजबूती से आगे बढ़ रही हैं।
सुधारों और इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश का दिख रहा असर
India GDP Growth FY26 के पीछे संरचनात्मक सुधारों और बुनियादी ढांचे में निवेश को भी महत्वपूर्ण कारण माना जा रहा है। नागेश्वरन ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में सरकार द्वारा लागू किए गए आर्थिक सुधारों ने अर्थव्यवस्था की नींव को मजबूत किया है।
उन्होंने बताया कि सार्वजनिक पूंजीगत व्यय और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स ने निवेश, रोजगार और उत्पादन को बढ़ावा दिया है। सड़क, रेल, बंदरगाह, डिजिटल नेटवर्क और अन्य बुनियादी सुविधाओं में हुए निवेश का सकारात्मक प्रभाव अब अर्थव्यवस्था पर दिखाई दे रहा है।
मुख्य आर्थिक सलाहकार का मानना है कि यही मजबूत आधार भारत को वैश्विक अनिश्चितताओं का सामना करने और दीर्घकालिक विकास की दिशा में आगे बढ़ने में मदद करेगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि निवेश, उपभोग और निर्यात में वर्तमान गति बनी रहती है तो भारत आने वाले वर्षों में दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है।
फिलहाल India GDP Growth FY26 के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था संतुलित विकास की राह पर आगे बढ़ रही है। मजबूत घरेलू मांग, बढ़ता निवेश, बेहतर विनिर्माण प्रदर्शन और सेवा क्षेत्र की मजबूती आने वाले समय में भी आर्थिक विकास को सहारा दे सकती है।

SOURCE: ANI




