Lok Sabha ने सोमवार को Insolvency and Bankruptcy Code Amendment Bill 2025 को पास कर दिया, जो भारत की वित्तीय और कॉर्पोरेट व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस बिल का उद्देश्य insolvency resolution process को और अधिक प्रभावी, तेज और पारदर्शी बनाना है। सरकार का मानना है कि Insolvency and Bankruptcy Code Amendment Bill 2025 के जरिए न केवल stressed assets की recovery तेज होगी, बल्कि देश के banking sector को भी मजबूती मिलेगी।
Finance Minister Nirmala Sitharaman ने Lok Sabha में इस बिल को पेश करते हुए कहा कि यह संशोधन पिछले कुछ वर्षों में Insolvency and Bankruptcy Code (IBC) के लागू होने के अनुभव और चुनौतियों के आधार पर तैयार किया गया है। उन्होंने बताया कि Insolvency and Bankruptcy Code Amendment Bill 2025 का मकसद insolvency प्रक्रिया में आने वाली व्यावहारिक समस्याओं को दूर करना और global standards के साथ तालमेल बैठाना है।
IBC की भूमिका और महत्व
Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 भारत में insolvency और bankruptcy से जुड़े मामलों को सुलझाने के लिए एक व्यापक कानूनी ढांचा प्रदान करता है।
इस कानून के लागू होने के बाद से ही banking sector में कई सुधार देखने को मिले हैं। खासकर Non-Performing Assets (NPAs) की recovery में तेजी आई है।
सरकार के अनुसार, IBC के माध्यम से बैंकों ने अब तक बड़ी मात्रा में stressed assets की recovery की है, जिससे financial system की स्थिति में सुधार हुआ है। Insolvency and Bankruptcy Code Amendment Bill 2025 इसी प्रक्रिया को और मजबूत करने के लिए लाया गया है।
Bill के मुख्य उद्देश्य
Insolvency and Bankruptcy Code Amendment Bill 2025 का मुख्य उद्देश्य insolvency resolution framework को मजबूत बनाना है। इस बिल में कई महत्वपूर्ण बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं, जो प्रक्रिया को अधिक efficient और time-bound बनाएंगे।
Finance Minister Nirmala Sitharaman ने कहा कि इस बिल के जरिए stakeholders के लिए value maximization सुनिश्चित की जाएगी और resolution process में governance को बेहतर बनाया जाएगा।
इस संशोधन के जरिए:
- insolvency प्रक्रिया को तेज करने पर जोर दिया गया है
- procedural delays को कम करने का प्रयास किया गया है
- judicial bottlenecks को दूर करने की दिशा में कदम उठाए गए हैं
- global best practices को अपनाने की कोशिश की गई है

Delay और backlog की समस्या
भारत में insolvency मामलों के निपटारे में देरी एक बड़ी समस्या रही है। कई मामलों में resolution process तय समय से कहीं ज्यादा लंबा खिंच जाता है। यही वजह है कि सरकार ने Insolvency and Bankruptcy Code Amendment Bill 2025 के जरिए इस समस्या को दूर करने की कोशिश की है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, देश में हजारों insolvency cases pending हैं और इन्हें निपटाने में कई साल लग सकते हैं। ऐसे में यह बिल system को अधिक efficient बनाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
Creditor-driven process पर जोर
इस बिल का एक महत्वपूर्ण पहलू creditor-driven insolvency process को बढ़ावा देना है। इसके तहत financial creditors को ज्यादा अधिकार दिए जा सकते हैं ताकि वे insolvency प्रक्रिया को तेजी से शुरू कर सकें।
इससे:
- कंपनियों के मामलों का जल्दी समाधान होगा
- litigation कम होगी
- business continuity बनाए रखने में मदद मिलेगी
विशेषज्ञों का मानना है कि Insolvency and Bankruptcy Code Amendment Bill 2025 के जरिए creditors की भूमिका मजबूत होगी, जिससे resolution process अधिक प्रभावी हो सकेगा।
Banking Sector पर असर
IBC लागू होने के बाद से ही banking sector में सुधार देखने को मिला है। इस कानून के तहत banks ने बड़ी मात्रा में खराब कर्ज (bad loans) की वसूली की है।
Finance Minister ने Lok Sabha में बताया कि recovery के आंकड़े इस बात का प्रमाण हैं कि IBC ने financial system को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
अब Insolvency and Bankruptcy Code Amendment Bill 2025 के लागू होने से:
- NPAs में और कमी आ सकती है
- banks की balance sheet मजबूत हो सकती है
- credit flow बढ़ सकता है
Industry और Economy के लिए महत्व
यह बिल केवल banking sector तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर पूरे economy पर पड़ सकता है।
- Ease of Doing Business में सुधार होगा
- निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा
- कंपनियों के restructuring process में तेजी आएगी
विशेषज्ञों के अनुसार, Insolvency and Bankruptcy Code Amendment Bill 2025 भारत को एक मजबूत और पारदर्शी आर्थिक ढांचे की ओर ले जा सकता है।

Opposition और चर्चा
Lok Sabha में इस बिल पर चर्चा के दौरान विभिन्न दलों के नेताओं ने अपने-अपने विचार रखे। कुछ नेताओं ने इस बिल का समर्थन किया, वहीं कुछ ने इसके प्रावधानों को लेकर चिंता भी जताई।(source)
हालांकि, सरकार का कहना है कि यह बिल व्यापक विचार-विमर्श और Select Committee की सिफारिशों के बाद तैयार किया गया है, इसलिए इसमें सभी पहलुओं का ध्यान रखा गया है।
आगे क्या?
Lok Sabha से पास होने के बाद अब Insolvency and Bankruptcy Code Amendment Bill 2025 को Rajya Sabha में पेश किया जाएगा। वहां से मंजूरी मिलने के बाद यह कानून बन जाएगा।
इसके बाद:
- नए नियम लागू किए जाएंगे
- insolvency process में बदलाव आएगा
- कंपनियों और creditors दोनों को नए framework के तहत काम करना होगा




