भारत में 5G लॉन्च को लेकर जितना शोर था, उतनी ही बड़ी निराशा आज कई यूज़र्स के बीच देखने को मिल रही है। हजारों लोगों की शिकायत है कि उन्होंने 5G रिचार्ज तो करा रखा है, लेकिन स्पीड 4G से भी खराब मिल रही है। सवाल सीधा है—अगर 5G इतनी एडवांस टेक्नोलॉजी है, तो फिर 5G Slow Speed India जैसी शिकायतें क्यों सामने आ रही हैं?
यह सिर्फ किसी एक कंपनी या किसी एक शहर की समस्या नहीं है, बल्कि इसके पीछे टेक्नोलॉजी, नेटवर्क स्ट्रक्चर, बिज़नेस मॉडल और यूज़र एक्सपेक्टेशन—चारों का रोल है। इस लेख में हम बिना किसी टेक्निकल घुमाव के, बिल्कुल साफ भाषा में समझेंगे कि भारत में 5G आखिर 4G जैसा या उससे भी स्लो क्यों महसूस हो रहा है।

भारत में 5G देने वाली कंपनियां: विकल्प ही कम हैं
सबसे पहले सच्चाई यही है कि भारत में अभी गिनती की ही कंपनियां 5G सर्विस दे रही हैं। यूज़र के पास विकल्प सीमित हैं। नई बड़ी कंपनियां मार्केट में नहीं आ रहीं और सरकारी नेटवर्क BSNL का 5G अभी भी सीमित इलाकों तक ही सिमटा हुआ है। कई शहरों और कस्बों में BSNL 5G का नामोनिशान तक नहीं है।
जब विकल्प कम होते हैं, तो प्रतिस्पर्धा भी कमजोर हो जाती है। और जहां कॉम्पिटिशन कम हो, वहां सर्विस क्वालिटी अपने आप दबाव में आ जाती है।
True 5G बनाम Fake 5G: यहीं से शुरू होती है असली कहानी
भारत में जो सबसे बड़ी कन्फ्यूज़न है, वो है True 5G और Non-Standalone (NSA) 5G को लेकर। एक ही कंपनी है जो शुरुआत से Standalone यानी True 5G नेटवर्क पर आगे बढ़ी। बाकी कंपनियों ने मजबूरी में NSA 5G लॉन्च किया।
NSA 5G असल में 4G नेटवर्क पर टिका हुआ 5G होता है। कागज़ों में यह 5G कहलाता है, लेकिन तकनीकी रूप से इसे 4.5G कहना ज्यादा सही होगा। यही वजह है कि ऐसी सर्विस में आपको 5G का नाम तो मिलता है, लेकिन एक्सपीरियंस 4G जैसा ही रहता है।
Network Congestion: एक टावर, बहुत सारे यूज़र
अब आते हैं सबसे बड़ी वजह पर—Network Congestion।
भारत में 5G लॉन्च के बाद करोड़ों यूज़र एक ही कंपनी की तरफ शिफ्ट हो गए। लेकिन टावर उतनी तेजी से नहीं बढ़े। नतीजा यह हुआ कि:
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एक ही टावर पर 5G मोबाइल यूज़र
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उसी टावर पर 4G यूज़र
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उसी टावर पर Air Fiber यूज़र
जब इतने सारे यूज़र एक ही टावर से डेटा खींचेंगे, तो स्पीड अपने आप डिवाइड हो जाएगी। यही कारण है कि कई जगह 5G की स्पीड गिरकर 4G से भी नीचे चली जाती है।
कंपनियां अभी 5G को Unlimited ऑफर के साथ चला रही हैं। जब तक इसका सही तरीके से मोनेटाइजेशन नहीं होगा, तब तक इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़े निवेश की रफ्तार भी धीमी रहेगी।

5G टेक्नोलॉजी की लिमिटेशन: Indoor में क्यों फेल हो जाता है 5G
यह बात बहुत कम लोग जानते हैं कि 5G की सबसे बड़ी कमजोरी है Indoor Performance।
5G हाई फ्रीक्वेंसी पर काम करता है। यह कंक्रीट की दीवारों, शीशे और लोहे को ठीक से पेनिट्रेट नहीं कर पाता।
यही वजह है कि:
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कमरे के अंदर स्पीड स्लो
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छत या खुले इलाके में स्पीड फास्ट
अगर आपको लगता है कि घर में 5G खराब है, तो छत पर जाकर टेस्ट करिए—अक्सर स्पीड कई गुना बढ़ जाती है। यह न आपकी गलती है, न पूरी तरह नेटवर्क प्रोवाइडर की। यह 5G टेक्नोलॉजी की फिजिकल लिमिटेशन है।
जल्दबाज़ी में खरीदे गए 5G फोन: यूज़र की सबसे बड़ी गलती
भारत में 5G आने से पहले ही 5G स्मार्टफोन बिकने लगे। लोगों ने जल्दबाज़ी में फोन खरीद लिए, जबकि यह क्लियर नहीं था कि:
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भारत में कौन से 5G बैंड आएंगे
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कौन सा फोन किस नेटवर्क के लिए ऑप्टिमाइज़ होगा
स्मार्टफोन कंपनियां अपने फोन को हर देश के नेटवर्क के हिसाब से मॉडिफाई करती हैं। लेकिन भारत में कई शुरुआती 5G फोन ऐसे थे जो Indian 5G Bands के लिए ऑप्टिमाइज़ ही नहीं थे।
नतीजा:
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फोन का मॉडेम ओवरहीट होता है
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बार-बार 4G और 5G में स्विच करता है
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स्पीड थ्रॉटल हो जाती है
खासतौर पर बजट सेगमेंट के कई फोन इस समस्या से जूझ रहे हैं। यहां गलती न यूज़र की है, न नेटवर्क की—बल्कि फोन मैन्युफैक्चरर की है।
Speed Test की गलतफहमी: नंबर देखकर खुश मत होइए
बहुत से यूज़र स्पीड टेस्ट में 100 Mbps देखकर खुश हो जाते हैं। लेकिन जब डाउनलोड करते हैं, तो सिर्फ 10–12 MBps दिखता है। यहां फर्क है Megabit और Megabyte का।
8 Megabit = 1 Megabyte
यानी 100 Mbps का मतलब हुआ करीब 12.5 MBps
ऊपर से स्पीड टेस्ट ऐप्स अक्सर शुरुआती कुछ सेकंड की पीक स्पीड दिखाते हैं, न कि स्टेबल रियल यूज़ स्पीड। यही वजह है कि आपकी उम्मीद और असल एक्सपीरियंस में फर्क दिखता है।
क्या 6G भी 5G जैसा ही निकलेगा?
यह सवाल मज़ाक में पूछा जाता है, लेकिन सच्चाई यह है कि टेक्नोलॉजी का नंबर बढ़ता है, एक्सपीरियंस अक्सर दो कदम पीछे चलता है। जब 6G आएगा, तब तक 5G ही सही मायने में मैच्योर होगा।
निष्कर्ष: शिकायत कम, समझ ज़्यादा जरूरी
5G Slow Speed India कोई एक वजह से नहीं, बल्कि कई कारणों का नतीजा है—कम टावर, ज्यादा यूज़र, NSA नेटवर्क, टेक्नोलॉजी लिमिटेशन, गलत फोन और स्पीड टेस्ट की गलतफहमी। सच यह भी है कि भारत दुनिया के उन गिने-चुने देशों में है जहां डेटा इतना सस्ता है। थोड़ा सब्र और सही जानकारी ही फिलहाल सबसे बड़ा समाधान है।





